कश्मीरीलाल जी इन दिनों बिहार प्रवास पर!मैं गजरौला पश्चिमी उतर प्रदेश में कार्यक्रमों,बैठक में!२५ सितम्बर दीनदयाल जयन्ति से २ अक्तूबर गांधी जयंति तक स्वदेशी सप्ताह शुरू हुआ है!
आदरणीय बहनों एवं भाईयो!
परसों रविवार को प्रधानमंत्री जी ने ‘आयुष्मान-भारत’ योजना का शुभारंभ कर दिया है!मुझे नहीं पता आप में से किस किस ने इसको पूरी तरह समझा है!
इसे युगपरिवर्तनकारी कहा जा रहा है!
हां! मैं भी मानता हूं कि यदि इसका अमल अच्छे ढंग से हो जाए तो यह इस देश के लिए विशेषकर गरीब व कम आय वर्ग के कोई 50 करोड़ लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है!
क्या है यह योजना..आओ थोड़ा समझें!
यह बिना एक रूपया खर्च किए 50 करोड़ लोगों को बिमार होने पर अच्छे इलाज की गारंटी देती है! वर्ष में 5 लाख रूपये तक का १० करोड़ परिवारों का ईलाज! बीमा योजना से! मरीज या उसके परिवार को कुछ नहीं देना,करना!
देश के ४५० जिलों में कोई १२०००सरकारी व प्राइवेट हस्पताल इसमें लगेगें! सवा लाख बैड सुरक्षित हुए हैं!
आयुर्वेदिक दवाओं, स्टंट,हार्ट आप्रेशन,एक्सीडैंट या बच्चा जन्म सहित सब प्रकार के मुफ्त इलाज की यह योजना दुनिया के किसी भी देश में अब तक की सबसे बड़ी योजना मानी जा रही है!
प्रधानमंत्री जी व सरकार ने जो करना था कर दिया!धन्यवाद!
अब हमारी (समाज) बारी़…हम क्या कर सकते हैं?
पहली बात तो देश समाज की, कम आयवर्ग के लोगों की सेवा का बड़ा अवसर अाया है! चूकना मत!
हम सब तुरंत इस योजना को समझें व इसे जनजागरण द्वारा सबको बताएं!
स्वामी विवेकानंद ने कहा था “यदि गरीब-अनपढ स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहा तो स्कूल(शिक्षक) को उस तक पहुंचना चाहिए!”
कई बार बहुत अच्छी सरकारी योजनाएं भी जनजागरण के अभाव में दम तोड़ जाती हैं!
आओ! हम सब संकल्प करें कि इस आयुष्मान योजना को देश के अन्तिम आदमी तक पहुंचाने हेतू जीजान से जुटें! ‘नरसेवा नारायण सेवा’ हम मानते ही हैं! पैसों के अभाव में आज के बाद कोई ईलाज रहित न रह जाए! इसलिए इस योजना का उपयोग करें!
तुलसीदास जी से पूछा रामचरित मानस लिखने में इतना श्रम क्यों किया?
तुलसी जी ने उत्तर दिया ‘स्वान्त:सुखाय’! अपने सुख के लिए! तो हम भी…स्वान्त: सुखाय…