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आंदोलन के दृश्य
आज मुझे कुरुक्षेत्र से भिवानी जाना था किंतु रास्ते में करनाल के पास बंद लगा था।टोल पर सब कुछ बिखरा पड़ा था। पहले दिन यूनियन ने वहां सब ध्वस्त कर दिया था पानीपत पहुंचा तो टेलीविजन पर बैरिकेड को उठाकर नीचे गिराते हुए आंदोलनकारियों के फोटो देखे।
तो मैं सोच में पड़ गया कि इस आंदोलन से कितने लोगों को, कितनी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही है?
और यह किसान यूनियन के स्वार्थी और अदूरदर्शी नेता आम नागरिकों की छोड़िए, किसानों का भी हित नहीं सोच पा रहे। अभी डेढ़ महीने तक रेलें रोके रखीं। अब लगातार मालगाड़ी ना आने से किसानों को भारी दिक्कत हुई कि यूरिया, खाद नहीं मिलने लगा। बिजली के ताप घर,कोयला सप्लाई ना होने से बंद होने लगे। तो इन यूनियन के नेताओं ने कहा “मालगाड़ी आ जाए,पर यात्री गाड़ी नहीं चलने देंगे। यानी जो नागरिक परेशान हैं,उनकी कोई चिंता नहीं। केवल अपना यूरिया, खाद आ जाए। अकेले अमृतसर से प्रतिदिन 15,000 लोग रोजी रोटी कमाने लुधियाना आते हैं,सब बेरोजगार हो गये। ऐसे लाखों परिवारों की, कितनी कठिनाईयां बढ़ गई हैं, मुर्ख नेताओं को ज़रा भी एहसास नहीं।
खैर! केंद्र सरकार भी अड़ी और पूरा रेलवे खोलना पड़ा। अब ‘दिल्ली कूच॔ के ऐलान से सामान्य जनता की भारी परेशानियां कर दी।
ये किसान यूनियन के नेता, 50 साल पहले के तौर तरीके अपना रहे हैं।अब जमाना बदल गया है, विरोध करने का तरीका भी बदलना चाहिए था। किंतु यह अदूरदर्शी और स्वार्थी नेता केवल समाज को कठिनाई में डालने के अलावा कुछ नहीं कर रहे।
सामान्य जनता का इनके प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हरियाणा,पंजाब में जिन से भी पूछा उसने एक ही बात कही “किसानों नेताओं की मांग ठीक है या नहीं, तो पता नहीं, पर आंदोलन बहुत गलत है। यह नुकसान और पीड़ा के अलावा कुछ नहीं दे रहा। केंद्र सरकार भी अब धीरे-धीरे सख्त हो रही है।आशा है जल्दी स्थिति सामान्य होगी।