May be an image of 2 people, people sitting and text that says "भला हो जिसमें देश देश वो काम सब किये T"
May be an image of 6 people, people sitting, people standing and indoor
पठानकोट, पंजाब में स्वदेशी कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत
कल जब मैं पठानकोट मे था तो वहांं अँकेश्वर जी ने मन्दिर धन संग्रह के दो प्रसंग सुनाये। उन्हीं के शब्दों में!
●”हम एक परिवार मे गए तो 62-63 वर्षीय माता निकली। उसने हमें घर मे बैठाया, अंदर गयीं और 21,000₹ हमें लाकर दे दिये। हम हैरान!”
“आपको गलती तो नहीं लगी, ये 21हजार हैं?” मैंने कहा।
माता जी बोलीं, “1992 मे जब बाबरी ढांचा टूटा तो भद्र्वाह (जम्मू-कश्मीर) से पिता जी भी गए थे। 1994 में अपनी मृत्यु से पहले उन्होँने मुझे कहा, “मेरे होते तो मन्दिर नहीं बन सका पर यह पैसे रखो और जब भी राम मन्दिर बने तो यह उसमें दे देना।”
माता आगे बोली, “मैं सोचती थी कि मेरे होते भी मुश्किल है, मन्दिर बनना। और मैंने भी अपने बच्चों को कह रखा था की यह पैसे तुम्हारे नाना जी ने मेरे पास छोड़े थे, जब कभी मन्दिर बने तो उसमें दे देना। पर राम जी की कृपा हो गयी, मन्दिर बनना शुरू हो गया, आप लोग लेने आ भी गये।हम धन्य हो गए।” हमनें उस माता के पैर छुए और राशि लेकर आ गए, धन्य तो हम ही हुए न?
●एक दुसरे ग्राम में एक अति समान्य परिवार से जब धन मांगा तो उस बहनजी ने हमें अपनी झोपड़ी मे बैठाया व गांव के ही दुकानदार से 25₹ उधार माँग लायी और हमें दे दिये। फिर बोलीं, “मैं कुछ दिन काम करके चुका दूंगी, आप तो दुबारा आयेंगे नहीं, राम जी को मेरे पैसे तो पहुंचने चाहिए।”
~सतीश कुमार