सिरसा में कल नागरिक गोष्ठी बहुत ही अच्छे और उच्च स्तर की हुई। जिसमें 250 से अधिक नागरिक बंधुओं ने स्वदेशी व रोजगार पर विशेष श्रवण किया। दूसरी तरफ कश्मीरी लाल जी का फरीदाबाद विभाग में आज गुरुगम में प्रवास हुआ।
हरियाणा के सभी 22 जिलों में इसी प्रकार के जिला सम्मेलन हो रहे हैं।जहां पर कश्मीरी लाल जी, मेरा व कमलजीत जी का प्रवास हो रहा है।
कल मेरा प्रवास सिरसा(हरियाणा) में था। मुझे दिल्ली से अपने सह विभाग संयोजक दर्शन जी के बेटे राहुल लेकर आ रहे थे। जो आजकल लंदन में सीए कर रहा है।
जब हम एक जगह जलपान के लिए रुके तो उसने मुझे बताया “इंग्लैंड में बाकी बहुत सी चीजें तो बहुत अच्छी हैं,किंतु वहां की परिवार व्यवस्था बहुत कमजोर है।
मैंने उसको पूछा ” वो कैसे? कोई उदाहरण बताओ!” तो उसने मुझे कहा “मेरा परिचित एक 17 साल का वहां लड़का है। किंतु वह अपने ही घर में किराया दे कर रह रहा है।”
मैंने पूछा “ऐसा कैसे हो गया?”
तो उसने कहा “वहां यह सामान्य बात है कि लड़का जब 17-18 साल का हो जाता है तो उसे अपना ही कमाना खाना होता है। फिर यदि वह घर पर भी रह रहा है तो उसको घर पर भी किराया अथवा भोजन का पैसा देना होता है। ऐसी कमजोर परिवार व्यवस्था वहां पर है।”
तभी मुझे स्मरण आया कि मैं जब 2 वर्ष पहले इन्हीं दर्शन जी के घर पर गया था तो रात को बुजुर्ग माता जी से मैंने पूछा “माताजी! बच्चे पूरी सेवा करते हैं या नहीं?”
तो माताजी ने तुरंत अधिकार सहित कहा “कि अगर सेवा नहीं करेंगे तो मेरे से मार नहीं खाएंगे?”
अब यह तो हमारे यहां का हाल है कि जिनके बच्चे इतने बड़े हो गए हैं कि उनके भी आगे बच्चों की शादियां हो गई है, फिर भी मां का पुत्र और पौत्रों पर ऐसा अधिकार? हम लोगों के यहां ये आम बात है!
परिणाम:सारे यूरोप,अमेरिका में वृद्ध आश्रम भरे रहते हैं।
और भारत में तो हैं ही बहुत थोड़े,जो हैं भी तो खाली पड़े हैं!
यह है भारत की परिवार व्यवस्था, परिवारिक सोच।