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IILM विश्वविद्यालय में स्टार्टअप कार्यक्रम में बोलने के बाद वृक्षारोपण करते हूए डा: अश्वनी महाजन व सीतेन्द्र सोरोत जी के साथ

गत दिनों में मेरा वा कश्मीरी लाल जी का हरियाणा का सभी 22 जिलों का प्रवास हुआ।
पहले ही जिले में विभाग स्तर के संयोजक ने मुझे कहा “सतीश जी। यहां पर जो भाजपा नेताओं के व्यवहार से हम बहुत परेशान हैं,किसी भी कार्यकर्ता का कोई काम नहीं हुआ,पिछले 5 साल में।”
मैंने कहा “तो फिर इस क्षेत्र में स्वदेशी काम नहीं करेगा क्या?”
तो वह बोला “नहीं-नहीं! काम तो हम भाजपा वालों से भी ज्यादा ही कर रहे हैं। और जिताएंगे भी।पर आपको अपनी मन की बात तो बता दें।”
एक दूसरे संसदीय क्षेत्र में अपने एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा “हमारे से तो सांसद- उम्मीदवार मिल ही नहीं रहा। उन्हें हमारे काम की कोई बहुत कदर भी नहीं दिखती।ऐसे में क्या करें?”
मैंने प्रतिप्रश्न पूछा “तुम्हारा मन क्या कह रहा है?”
तो वह बोला “हम तो किसी व्यक्ति को जिताने में नहीं लगे,अपने विचारधारा, अपने संगठन और अपने देश को जिताने में लगे हैं।
इसलिए उम्मीदवार का व्यवहार जो भी हो, हम पूरा तन मन से लगे हैं, लगेंगे।”
फिर मैं जब करनाल पहुंचा वहां भी कुछ ऐसा ही था।
मैंने प्रश्न किया तो कार्यकर्ता विक्रम चावला व पंकज सेठी ने कहा यहां के उम्मीदवार तो हमारे अपने ही रचे बसे हैं और वह तो सभी अधिकारियों से मिलने को तत्पर रहते हैं। और यहां से तो हम रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे।”
मैं सोच में था कि धन्य हैं हमारे कार्यकर्ता! जो अपनी विचारधारा,संगठन व देश की जीत हो जाए यह मन में विचार रखकर ही तन मन से पूरी तरह लगे हैं। उन्हें ना कोई अपने काम होने की अपेक्षा है, ना कोई स्वार्थ साधने की। यहां तक कि उनका नाम आए, फोटो आए यह भी अपेक्षा नहीं। वास्तव में ऐसे ही कार्यकर्ताओं के बल पर यह राष्ट्रवाद का शंखनाद सारे देश और दुनिया में गूंज रहा है।