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अमृतसर में सुरेंद्र जी, अरविंद जी, दीपक जी से अनौपचारिक बातचीत करते हुए
मैं 4 दिन से पंजाब के प्रवास पर हूं। पठानकोट में जन्मशताब्दी की बैठक लेकर जब अमृतसर पहुंचा तो वहां अपने कार्यकर्ता सुरेंद्र जी मिले।
मेरे से कहने लगे “सतीश जी! यह रेलवे कब तक चल जाएगी। इस आंदोलन के कारण से तो हम बड़ी कठिनाई में हैं?”
मैंने आश्चर्य से पूछा “तुम्हें क्या करना है?”
कहने लगे, “मैं पठानकोट का रहने वाला हूं पर नौकरी अमृतसर में है। मेरा पठानकोट से अमृतसर का ₹450 का मासिक पास बना हुआ है। पर अब ₹150 केवल एक साइड के बस में लग जाते है, मेरा तो बजट ही बिगड़ गया है।”
जब अपने महानगर संयोजक अरविंद जी आए तो मैंने उनसे पूछा “लोगों का क्या कहना है इस विषय में?”
तो उन्होंने तुरंत दैनिक यात्री संघ के अरुण जी से बातचीत की। मैं फोन पर सुन रहा था।
वह कहने लगे “अमृतसर से लुधियाना लगभग 15000 लोग रोज जाते हैं पिछले 2 दो माह से इस रेल रोको आंदोलन के कारण से सब बुरी तरह से परेशान हैं। कईयों के रोजगार तो पूरी तरह छूट गए हैं। पता नहीं रेल पटरियों पर बैठने वालों को यह बात क्यों नहीं समझ में आती।”
वह आगे बोले “हम ही नहीं व्यापारी भी परेशान हैं, त्योहारों का सीजन है उन्हें माल ही नहीं मिल रहा तो बिक्री क्या करें?”
अरविंद जी ने पूछा “तो क्या करना चाहिए?”
तो वह बोले “किसी तरह से हो, बस रेल चलाओ, हम हजारों लोगों को लेकर प्रदर्शन करने को तैयार हैं।”
वे आगे बोले “पंजाब बंद करवाने वालों की मांगे सही है या नहीं पर पंजाब के लाखों लोगों का रोजगार, काम रोजी-रोटी यह तो दिक्कत में आ ही गई है। सरकार को और आंदोलन करने वालों को दोनों को समझना चाहिए और तुरंत रेल चलानी चाहिए।”
उनकी बातें सुनकर मैं सोच में था की जिससे दूसरों को तकलीफ हो ऐसे आंदोलन का कोई फायदा है क्या?
खैर! आशा है जल्दी ही परिस्थिति सामान्य होगी। विश्वास पर दुनिया टिकी है।