बहन रितु गोयल और स्वदेशी कार्यकर्ता अरिजीत सरदार की बनाई पेंटिंग
गुड़गांव की यह बहन पिछले 2 वर्षों से गुड़गांव से लेकर चंडीगढ़ तक के विद्यालयों में बच्चों को नैतिक शिक्षा, खेलकूद,देशभक्ति व स्वदेशी का पाठ पढ़ाने के लिए स्वयं प्रेरणा से जाती है!सेवा भारती की गुड़गांव की उपाध्यक्ष रितु से मैंने पूछा “अभी तक कितने विद्यालयों में जाना हुआ है?” तो उसने बताया “कोई 300 विद्यालयों में लगभग 2लाख बच्चों को अभी तक में संबोधन कर चुकी हूं!और कोई 2 वर्ष से इस मिशन में हूँ!” कोई संस्था नहीं,कोई सहयोगी नहीं,स्वयं प्रेरणा से व स्वयम की इच्छा से।
तुलसी जी से किसी ने पूछा कि “रामचरितमानस क्यों लिखा?” उन्होंने उत्तर दिया स्वांत: सुखाय! अपने मन को सुख मिलता है,अच्छा लगता है,इसलिए!
ऐसे ही एक दूसरा स्वदेशी का कार्यकरता है:अरिजीत सरदार!बंगाल के वर्धमान जिले का!मैं जब कोलकाता प्रवास पर गया था तो मैंने उससे कहा “चलो कुछ दिन स्वदेशी का कार्य करो,तुम्हारी फोटोग्राफी व पेंटिंग का स्वदेशी में भी उपयोग करेंगे!”और वह 25 दिन के लिए दिल्ली स्वदेशी कार्यालय पर आ गया!फिर उसकी इच्छा हुई तो सात-आठ महीने उसने बाबा रामदेव जी के हरिद्वार आश्रम में लगाए!अब वह पेंटिंग करता है फोटोग्राफी करता है,नीचे एक मुर्गे की पेंटिंग है!उसको देखकर लगता नहीं कि यह किसी कलाकार ने पेंट्स के साथ हाथ से बनाई हैं!यही लगता है कि शायद यह खींची हुई फोटो हैं…उसका भविष्य उज्जवल है… इच्छाशक्ति सफलता का पहला सूत्र है…