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आज दिल्ली स्वदेशी कार्यालय पर स्वदेशी जा:मंच की अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक प्रारंभ हुई!

5 दिन पूर्व भारत ने एक सैटेलाइट को अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर ऊपर,(जो 740 किलोग्राम का था) उसे एक 3 टन की सैटेलाइट मिसाइल से मार गिराया।केवल तीन मिन्ट में ही।और दुनिया में सेटेलाइट को भेदने वाला चौथा देश बन गया भारत।
कुछ मैकालेवादी लोगों ने हाय तौबा करना स्वभाविक ही था। किंतु यह याद रखें! इतिहास में,हम कमजोर हुए तभी हम मुगलों और फिर अंग्रेजों के दास भी हुए।
दुनिया में उभरना है, नेतृत्व करना है,तो उसकी पहली अनिवार्य शर्त है शक्तिशाली होना।
रामायण का प्रसंग सबको याद ही है। जब समुद्र से रास्ता मांगते 3 दिन राम जी प्रार्थना करते रहे।लेकिन समुद्र ने रास्ता नहीं दिया तो राम जी को भी शक्ति प्रदर्शन करना ही पड़ा।
इसी को तुलसीदास जी ने कहा
“विनय न मानत जलधि जड़, गए 3 दिन बीत
बोले राम सकोप तब,भय बिन होय न प्रीत।”
अतः दुनिया में यदि सब को मित्र बनाना है तो आपको इतना शक्तिशाली तो होना ही चाहिए, कुछ भय भी बना रहे।
मोदी सरकार द्वारा अंतरिक्ष में पहुंच, वहां शक्ति प्रदर्शन,उसी परंपरा में है। 1998 में एटॉमिक विस्फोट कर भारत ने विश्व पटल पर प्रवेश किया था,तो इस बार मारक सैटेलाइट भेजकर,भारत ने दुनिया में अपना नेतृत्व स्थापित कर दिया है।…सब तरफ हो गयी जय जय कार!