बिकानो ब्रांड के मालिक केदारनाथजी व उनके सपुत्र नवरत्न अग्रवाल से गपशप! डा:अश्वनी राष्ट्रीय मुद्दों पर स्वदेशी लड़ाई के बारे बोलते हुए! फिर मंच पर सरोजदा,कमलजीतजी, व गुरूद्वारे के अध्यछ हरजीतसिंह जी,जो स्वदेशी के महत्व पर बहुत अच्छा बोले!व दिल्ली के स्वदेशी कार्यकर्ता ध्यान से विषयों को सुनते हुए!
पैप्सी-लेज़ के कुरकुरे व लहर के चिप्स,
देसी बिकानेरी-भुजिया व पापड़ से पस्त!
आज बिकानेरी भुजिया(बिकानो)के मालिक केदारनाथ अग्रवाल व उनके सपुत्र नवरत्न जी हमारे दिल्ली के प्रान्त सम्मेलन की अध्यक्षता करने आए!
उदबोधन पूरा कर जब वे जाने लगे तो मैने उनसे बातचीत की!
मैने पूछा लाला जी कब से बिकानेरी भुजिया चल रही है? पैप्सी की लेज़,लहर के चिप्स के कारण बिक्री पर फर्क पड़ा है,क्या?
वे हंसते हुए बोले “हमारे पर क्या असर होना है,उनसे पूछो उनकी क्या हालत है?”
“मैं दिल्ली में 1954 में आ गया था! चादंनी चौंक में एक छोटी सी दुकान की!अपने हाथ से ही बनाता व स्वयं ही बेचता था! धीरे धीरे काम चल निकला और आज…!!”
नवरत्न बताने लगे “केवल हमारे अपने परिवार के चार ब्रांड हैं! कोई 40 देशों में हम एक्सपोर्ट करते हैं,दुबई से लेकर अटलांटा तक हमारे आउटलेट हैं!भगवान की कृपा है! हम इनसे परेशान नहीं हैं,वो हमारे से हों तो पता नहीं!”
मैं सोच में पड़ गया कि हम तो सोचते हैं कि ये विदेशी कंपनियां बड़ी माहिर हैं, पर हमारे लाला जी क्या कम हैं… फिर मैने थोड़ा विस्तार से पता लगाया इस बिकानेरी भुजिया के नमकीन,मिठाई साम्राज्य का..!
बिकानेर के कुल अग्रवाल परिवार का तो टर्नओवर 5000 करोड़ का है…अब जरा अलग अलग हैं, कुछ झगड़े भी हैं पर सब मिलाकर पैप्सी के लेज़,लहर कुरकुरों नमकीन पर कहीं भारी पड़ते हैं!
स्वदेशी,विकेन्द्रित कंपनिया कैसे इन मार्किट स्ट्रेटिजी में एक्सपर्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सफलतापूर्वक चुनौती दे रहीं हैं,बिकानेरी भुजिया इसका सटीक उदाहरण है!
कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके एक सफल प्रांत समम्मेलन किया जिसके अंत में एक स्वदेशी संदेश रैली भी हुई जिसे राजौरी गार्डन के मेन चौंक में दीपक शर्मा प्रदीप जी नें संबोधित किया!