सायंकाल में शीला स्मारक का मनोरम दृश्य!
कहावत है कश्मीर से कन्याकुमारी भारत एक है!
यह कन्याकुमारी भारत के अंतिम छोर पर,तमिलनाडु प्रांत में बीच समुद्र स्थित है!
यह इसलिए भी प्रसिद्ध हो गया कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका जाने से पूर्व 3 दिन वहां शिला पर बैठकर तपस्या की थी!वह समुद्र में कूद कर तैरते हुए 3 फर्लांग दूर स्थित इस शिला पर जाकर समाधिस्थ हुए!
इस शीला का नाम कन्याकुमारी इसलिए पड़ा कि यहां कहते हैं कि मां पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी!वहां पर एक पैर का निशान बना हुआ भी है!
अभी 1963 में जब स्वामी विवेकानंद का जन्मशताब्दी वर्ष था,उस समय पर वहां पर संघ के स्वयंसेवकों के प्रयास से विवेकानंद शिला स्मारक खड़ा हुआ!
संघ के पूर्व सरकार्यवाह एकनाथ रानाडे जी ने यह भगीरथ प्रयत्न किया!यद्यपि वह सारा इलाका ईसाइयों से भरा हुआ है,फिर भी परम पूजनीय गुरु जी याने संघ के दूसरे सरसंघचालक,की योजना से एकनाथ जी ने ना केवल वहां पर अति भव्य स्मारक खड़ा किया बल्कि विवेकानंद केंद्र के सैकड़ों वानप्रस्थी व ब्रह्मचारी विस्तारक निकाले!जिन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश समाज में शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिक उत्थान में बहुत अहम भूमिका निभाई है!
आज स्थान पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक पर्यटक जाते हैं!देश भर से ही नहीं दुनिया भर से आध्यात्मिक पर्यटन के लिए यहां पर लोग आते हैं!जिसके कारण से ना केवल हिंदुत्व और स्वामी विवेकानंद का संदेश सारी देश और दुनिया में फैल रहा है!बल्कि उस जिले की इकॉनमी में भी बहुत बड़ा विस्तार हुआ है!हजारों लोगों को रोजगार मिला है!और भारत के इस तमिल प्रांत में हिंदुत्व का एक व्यापक केंद्र देश भक्ति का प्रसार भी कर रहा है!