केरल में जनता सड़कों पर व राम मंदिर पर विशाल धर्मसभा।
पिछले 3 दिनों से केरल उबाल पर है। 2 दिन का लगातार बंद,धरने प्रदर्शन, बमबारी,लाठीचार्ज आंसू गैस।
कारण सबको पता है। गत 3 महीने से केरल की वामपंथी व धर्म विरोधी सरकार अंततः दो महिलाओं को शबरीमाला के अय्यप्पा मंदिर में भेजने में सफल हुई। पर उसका इतना विरोध हो रहा है की 70 वर्षों में केरल में ऐसे बंद और प्रदर्शन नहीं हुए।
मानों सारा केरल ही सड़कों पर उतर आया है।क्या महिला क्या पुरूष, क्या बच्चे क्या बूढ़े, सब विरोध प्रदर्शन में लगे हैं! क्मयूनिस्ट पार्टी की गुंडागर्दी से सारी केरल की जनता निपटने में लगी है!
दूसरी तरफ राम मंदिर के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने इंटरव्यू में कहा है की कोर्ट के फैसले के बाद ही कोई अध्यादेश आ सकता है।याने मदिंर पर कोर्ट के फैसले की सरकार इन्तजार करेगीै!पर कोर्ट ने सुनवाई फिर आगे डाल दी है!
इन दोनों ही मामलों में कोर्ट जनता के मन में जो है उसे भांपने में पूरी तरह असफल हुई है।
ना केरल में सुप्रीम कोर्ट की मानी जा रही है ना अयोध्या में उसके फैसले का कोई असर होना है। अंततः केरल में जनता विजई हो रही है और अयोध्या में राम मंदिर भी बनेगा तो जनता की प्रतिनिधि संसद के प्रस्ताव से ही।
चाहे पहले बने,चाहे कोर्ट के निर्णय के बाद बने, अंततः शबरीमाला वा अयोध्या इसका फैसला जनता ही करेगी। वैसे भी लोकतंत्र में सुप्रीम तो जनता ही होती है।