निहाल सिंह व दमोह की स्वदेशी टीम
आज सवेरे मै अहमदाबाद से आते हुए गुडगावं उतर गया! मुझे अपने राजनेहरू VC के घर जाना था! ओला टैक्सी चला रहे ड्राईवर जो पढा लिखा लगता था से मैने पूछा “कहां के हो भाई,कितना कमा लेते हो,कब से चला रहे हो?” उसने मुस्कुरा कर उतर दिया “मै हांसी का रहने वाला निहालसिंह हूं, डबल एम ए, बीएड व c-tet किए हूं!दो साल से टैक्सी चला रहा हूं!वैसे मै इस काम को छोटा समझता था! इसलिए पहले मैने दिल्ली आके नौकरी की फिर एक बिजनेस किया पर मै किसान परिवार का,बडा घाटा उठाया! ..,जब मै निराश था तो एक दोस्त ने ही कहा अरे कोई काम छोटा नहीं होता चल मेरे साथ और मै ड्राइवरी जानता तो था ही किश्तों पर एक गाडी खरीदी, पहली बार तो घर से मदद ली पर फिर मैने खूब मेहनत की! ओला से टाईअप कर 12-13घंटे गाडी रोज चलाता! कमाई बहुत अच्छी होने लगी! 7 महीने बाद एक और गाडी डाल ली! काफी सोच समझकर तीन डेराइवर रख लिए! इससे दोनों गाडियां 17-18घंटे तक चला लेते हैं रोज! मैने पूछा नैट क्या कमाते हो?” उतर सुनकर विस्मय हुआ! वह बोला “दोनों गाडियों से रोज 5000₹ तक आ जाते हैं पर 60,000₹ तीन ड्राइवरो का गैस खर्च किश्त सब देकर 75 से 80 हजार तक कमा लेता हूं! और हां अगले महीने एक और गाडी भी ले रहा हूँ!” वह विजयीस्वर में बोल रहा था! उसको विदा करते हुए मै सोचने लगा हिम्मत, मेहनत व सूझबूझ से हमारे युवा काम करें और किसी काम को छोटा न समझे तो रोजगार की कमी नहीं, क्यों?