इन दिनों रोजगार एक बड़ा मुद्दा है!पकोड़े बनाने वाले से भी कोई उद्यमी बन सकता है क्या? इसकी खोज करते हुए मुझे एक ऐसे चपरासी की स्टोरी मिली जो बाद में अरबपति बन गया।मुझे अछी लगी तो सोचा,आपको भी सुनाऊँ..ठीक है?
गुजरात के महुआ कस्बे के रहने वाले-बलवंत पारीख! 1941 में मुंबई में पढ़ाई के लिए गए!किंतु 1942 में जैसे ही क्विट इंडिया की बात चली वह वापस अपने गांव आ गए! आजादी की अलख जगाई!एक साल बाद वापस जाकर पढ़ाई तो पूरी की पर उसमें उनका मन बिल्कुल नहीं था!फिर उन्होंने एक प्रिटिंग और डाइंग प्रेस पर काम किया। कैसे?एक लकड़ी के व्यापारी के यहां बतौर चपरासी!बहुत कम आय थी।इतने में शादी हो गई तो पत्नी को भी वहीं ले आए और वहां पर वेयर हाउस के एक स्टोर में ही पति-पत्नी रहने लगे।कुछ अपना काम करना चाहिए,ऐसा हर समय उनके दिमाग में रहता था।
तभी एक सेठ जी ने उनसे कहा कि ठीक है,पैसे मैं लगाता हूं,काम तुम करो!और उन्होंने विदेश से पेपर डाई व अन्य प्रिंटिंग से संबंधित सामान मंगाना शुरू किया!जल्द ही उन्हें ध्यान में आ गया और उन्होंने अलग से अपने छोटे भाई सुरेश पारीक के साथ एक लकड़ी चिपकाने वाली गोंद बनाने की फैक्ट्री शुरू की! मेहनत,लगन और सूझबूझ-उद्यमिता के गुण तो थे ही!
आप भी आज उसका नाम जानते हो यह और कोई नहीं,यह थे, Pidilite-फेविकोल गोंद के जनक! आज भारत ही नहीं दुनिया में जाना पहचाना ब्रांड है!फेवीक्विक व M-seal भी उन्हीं का है!देश की 70% गोंद मार्केट का हिस्सा है!अमेरिका से सिंगापुर तक इनका व्यापार है!आज कोई लगभग ₹12000करोड़ की कंपनी है!हजारों लोग उनके पास काम कर रहे हैं!
बलवंत पारीख चपरासी से अरबपति बन गए…एक चाय बेचने वाले ने आज देश व् दुनिया आगे कर रखी है तो कोई पकोड़े बेचने वाला भी भविष्य में….क्या लगता है?