डॉ.अशवनी जी, नीरू बहिन जी और जयसिंह शक्तावत जी
“जाइये वह काम भी तो जरुरी है, रात तक यह ड्रिप व् injection पुरे हो जायेंगे, तब तक आप वापिस आ ही जायेंगे फिर घर चलेंगे” हस्पताल के बैड पर गंभीर बीमारी की दवाई(ड्रिप से) लेते हुए नीरू बहिन जी ने पति डॉ.अशवनी जी को कहा…वे असमंजस में थे क्योंकि कार्यालय पर एक स्वदेशी की आवश्यक बैठक थी नीरू जी की बात सुन कुछ सोचा ,और वे चल पड़े। 7-8 महीने से वे एक कठिन रोग से लड़ रहीं थी,इधर डा: साहेब चीन से लड़ने(स्वदेशी सुरक्षा अभियान)में लगे थे। किन्तु नीरू जी ने महारैली तक अश्वनी जी को रोकने का तो सवाल ही नहीं…हर समय अभियान का काम करते रहने को प्रोत्साहित किया…और वे दिन रात जुटे रहे!…सुसंयोग रैली आते आते उन्होंने रोग पर विजय पा ली,अब ठीक हैं…ईश्वर का धन्यवाद
त्याग इनका भी कम नहीं– 4 अगस्त को राजस्थान के विचार विभाग प्रमुख जयसिंह शक्तावत जी पर वज्राघात हुआ। उनका एकमात्र 38 वर्षीय पुत्र अचानक बीमार हो चल बसा। पर 5 सितम्बर को मासिक प्रक्रिया पूरी कर स्वदेशी के एक आवश्यक प्रवास पर चल पड़े। दिल्ली रैली में सबको साथ लेकर पहुंचे…. पुरानी कविता याद आरही है…किस रज से बनते कर्मवीर…