आज लालकृष्ण आडवाणी जी का जन्मदिवस है! जन्मदिन पर उनको हार्दिक शुभकामनाएं
पिछले दिनों दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की पुस्तक से एक प्रसंग पढ़ा! इटली के अंदर,वहां के राष्ट्रवादी नेता हुए मैजिनी!उन्होंने संपूर्ण इटली राष्ट्र को जागृत किया,संगठित किया!
किंतु 1848 मैं जब गृह युद्ध का समय आया तो उन्होंने कहा कि युद्ध कला के जानकार गैरीबाल्डी को देश का नेतृत्व करना चाहिए। जिसे war of Rome भी कहते हैं!
किंतु बड़ी बात है कि युद्ध जीतने के पश्चात गैरीबाल्डी ने कहा कि मैं युद्ध कला जानता हूं!शासनकला नहीं!इसलिए नेतृत्व किसी और को सौंप कर वह अलग हो गए!मैजिनी व गैरिबालडी को इटली के राष्ट्रीय नायक माना जाता है।
1984 में जब भाजपा बुरी तरह हार गई!केवल 2 सीटें रह गई तो अटल जी ने कहा कि पार्टी को फिर से खड़ा करने का काम आडवाणी जी कर सकते हैं!अतः उन्हें अध्यक्ष बनाया गया!
उधर देश में नई जागृति लाकर जिस समय भाजपा की 168 सीटें आ गई तो आडवाणी जी ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री पद के लिए अटल बिहारी वाजपेई ही उपयुक्त हैं!ओह.. यही है ध्येयवाद!
यद्यपि पार्टी को दो सीटों से इतना आगे लाने का काम यह अडवाणी जी ने किया था, किंतु ‘राष्ट्र प्रथम..मैं बाद में’ इसका ध्यान रखते हुए तथा देश में अटल जी के प्रति विश्वास देखकर, उन्होंने ऐसा किया!
1985 से पहले भाजपा का वैचारिक पथ ‘गांधीवादी समाजवाद, था। उसको बदलकर एकात्म मानव दर्शन आधारित पार्टी बनाने का काम,तथा हिंदुत्व की राह पर चल कर भी राजनीति में विजयी हुआ जा सकता है। यह उत्कृष्ट कार्य उन्होंने किया।
यह काम आडवाणी जी ने तब किया,जब उन्होंने राम जन्मभूमि के मुद्दे पर सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथ यात्रा निकाली। जिसे स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक मुहिम… माधवराव सिंधिया ने कहा।
वैचारिक दृढ़ता,संगठन कौशल्य व व्यवहारिक राजनीति इसका अद्भुत तालमेल दिखा लालकृष्ण आडवाणी में!