दिल्ली में गत महिला सम्मेलन के समय बैठी टीम स्वदेशी
आज सवेरे The Economic Times की ख़बर जैसे ही पड़ी कि भारत की ईकामर्स क्षेत्र की सबसे बडी कंपनी फ्लिपकार्ट अमेरिकी बडी कंपनी वालमार्ट को बिकने जा रही है तो माथा ठनका!,
यद्यपि बात तो बहुत दिनों से चल रही थी,पर यह आज ही होने जा रहा है, ध्यान न था!
यह सौदा कोई 15 बिलियन डालर या 100अरब रूपये का है! यह इस क्षेत्र में दुनिया के इतिहास की सबसे बडी डील बतायी जा रही है!
मैने अपने डा:अश्वनी महाजन जी से आते ही इसके बारे पूछा तो वे बोले “यह देश के लिए नुक़सानदेय तो है ही पर अनैतिक व क़ानून संगत भी नहीं है!”
मैने कहा वो कैसे? तो वे बोले “क्योंकि ई कामर्स में या रिटेल मल्टीब्रेडं में विदेशी कंपनियाँ आ ही नहीं सकती, इसलिए इन्होंने यह सौदा एक तो सिंगापुर में किया है! दूसरा यह कह रहीं हैं कि हम तो केवल मार्केटप्लेस ही ख़रीद रहीं हैं जबकि यह चोर दरवाज़े से आना हो रहा है, रिटेल व ई कामर्स में ही”
डा: अश्वनी महाजन जी ने आज प्रधानमंत्री जी को एक पत्र भी लिखा है, इस डील को किसी तरीक़े से रोकने को कहा है!
मेरा संदेश गया ही था कि मुम्बई के अपने अतुलजी का फ़ोन आ गया “सतीशजी आपको पता नहीं है,यह फ्लिपकार्ट में तो पहले ही अधिकांश पैसा विदेशीयों का लगा है, और फिर किसी प्राइवेट कंपनी को उसके मालिक द्वारा बेचने में हम कैसे आपत्ति कर सकते हैं?”
मैने कहा “सुनो, अतुलभाई, इस देश की सामान्य जनता यह जानती है कि Amazon विदेशी व फ्लिपकार्ट भारतीय कंपनी है! चाहे उसमें जापानी SoftBank का या Tiger global आदि का पैसा लगा था,पर सबकुछ था तो चंडीगढ़ के सचिन बंसल व बिन्नी बंसल के हाथ ही, जो IIT दिल्ली में इकट्ठा पड़े हुए दोस्त हैं व Amazon से निकलकर कंपनी बनाई थी 2007 में!”
“इसके बाद तो वे या तो पूरी तरह बाहर हो जाएँगें या इन अमेरिकियों के केवल नौकर बन कर रहेंगे!”
फिर मैने कहा “कि देश की जनता ने फ्लिपकार्ट को विश्वास इसलिए दिया था कि यह भारतीय कंपनी है व विदेशियों को टक्कर दे रही है,फ्लिपकार्ट मैनेजमेंट को यह अधिकार किसने दिया कि वह जनता के विश्वास से खड़ी कंपनी को विदेशियों को बेच दे, इसलिए यह सौदा पूरी तरह अनैतिक भी है!”
“जो अमेरिका हमारे लोगों को H-1Bवीज़ा देने से इन्कार कर रहा है,हमारे पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने को कह रहा है,उस देश की कंपनी को हम अपनी सबसे बडी कंपनी कैसे दे दें?यह पूरी तरह गल्त है,अत:इसका विरोध होना ही चाहिए!”