ड्राईवर श्रवण,प्रो:सोमनाथ के साथ सहज संवाद!
कल मैं कुरुक्षेत्र में अपने प्रोफेसर बलदेव जी वीसी के ड्राइवर से बात कर रहा था! वैसे तो वह बार-बार कहता था “साहब कोई बहुत कमाई नहीं है!”किंतु उसकी वेशभूषा,परिवार की स्थिति देख कर मुझे लगा कि इसकी गहराई से जरा पूछना चाहिए! तो मैंने “पूछा इस गाड़ी से कितना कमा लेते हो?” थोड़ा संकोच करते हुए वह बोला “इस गाड़ी कि किश्त है,तेल का खर्च भी है!थोड़ी ही कमाई है!”
किन्तु मैंने निकाल लिया कि उसको ₹16-17000 जरूर इस से बचता है!फिर मैंने पूछा “सुना है,तुम्हारी दो और भी गाड़ियां हैं? वह बोला “हां जी! मैं तो अनपढ़ आदमी हूं दसवीं भी पास नहीं हूं पर मैंने पिछले 12 साल में मेहनत करके और अपनी गाड़ी के अलावा दो और गाड़ियां फाइनेंस करवाकर डाली हैं! दोनों के अलग से ड्राइवर भी रखे हैं!” जब मैंने पूछा “उनसे भी कितनी कमाई हो जाती है?”
तो थोड़ा इधर-उधर करते हुए बोला “हां बस ₹10-12000 बच ही जाते हैं!” फिर मैंने पूछना “सुना है तुम्हारी पत्नी भी पिछले साल से काम करने लगी है?” वह बोला हां उसको भी एक डिस्पेंसरी में लगवा दिया है वह भी १२-१३०००₹ ले आती है!”मैंने देखा कि धीरे-धीरे करते हुए तो 40-45000 ₹पा रहा है!
पर वह कहने लगा “क्या कमाई जी? मेरे तो मकान का किराया ही 8000₹ है!” फिर मैंने कहा “सुना है,तुम्हारा पुराना मकान और जमीन भी है?” तब थोड़ा खुला और बोला “हाँ! चार साडे चार हजार किराया उससे भी आता है! गांव से कुछ गेहूं भी आ जाता है और घर का काम अच्छा चल जाता है!वैसे मैंने दो कमेटी अभी डाली हैं,अभी उससे मिला तो नहीं है पर शायद आगे उससे भी कुछ अच्छा लाभ मिल जाए!”
मैं सोच में पड़ गया! ये अनपढ़,पर काम करने वाला ड्राइवर ऐसे ही मेहनत व सूझबूझ से कुल मिलाकर 45000 ₹तक कमा लेता है! यानी साधारण भारतीय मेहनत से,ईमानदारी से व सूझबूझ से कम पढ़ा होने के बावजूद भी बहुत अच्छे में अपनी घर गृहस्ती चलाता है! स्वरोजगार से ठीक कमाई करना कोई बड़ा कठिन भी नहीं है! स्वाभिमान तो रहता ही है मालिक होने का!
दुनिया के लोग खर्चा ज्यादा करते हैं बचत कम! पर हमारे यहां महिलाएं भी मिलकर बचत अधिक करते हैं,खर्चे कम! यही है भारत की अर्थव्यवस्था का राज! परिवारिक अर्थव्यवस्था का भारतीय दृष्टिकोण! स्वरोजगार से अच्छी कमाई का देसी माडल!