आज सवेरे ही मैंने एक समाचार देखा तो सोचा अपने स्वदेशी चिट्ठी के पाठकों को भी बताऊं। भारत ने अपना पहला पूर्णतया स्वदेशी विमान वाहक पोत आई एन एस विक्रांत निर्माण कर लिया है।
विश्व में केवल 5 देश ही ऐसा करने में सक्षम है। कोच्चि शिपयार्ड कंपनी द्वारा निर्मित इस विमान वाहक पोत को वाजपेई सरकार के समय शुरुआती आर्डर जारी हुआ था। यह 45000 टन का है। इस पर 36 से 40 विमान रखे जा सकते हैं।इस पर कुल लागत 23000 करोड़ों रुपए आई है।यह 265 मीटर लंबा है जो कि एक छोटे द्वीप जैसा है।
भारत के पास एक पहले से ही है अब यह मिला कर दो हो गए हैं।चीन के भी दो विमान वाहक पोत है वह तीसरा जल्दी लाने वाला है।हमें भी तुरंत तीसरा ऐसा पोत बनाना की शुरुआत करनी होगी।कंपनी के सीईओ ने कहा है अब हम केवल 5 वर्षों में ही ऐसा पोत बना देंगे। हिंद महासागर में चीन की चुनौती गंभीर है।
वास्तव में रक्षा,आयुध निर्माण में पिछले कुछ वर्षों से भारत में तेजी आई है।जहां 2013 में हमारा हथियार निर्यात केवल 500 करोड रुपए था अब वह 14000 करोड़ तक पहुंच गया है।सबसे बड़ी बात भारत ने अपने रक्षा खर्च में स्वदेशी निर्मित हथियारों का बड़ा इजाफा किया है और आयात में कटौती की है।
नीचे:गत दिनों काशी में स्वाबलंबी भारत अभियान का प्रांतीय अभ्यास वर्ग हुआ। भगवती प्रकाश जी मुख्य वक्ता रहे।