एक चिट्ठी, खान सर के नाम।
प्रिय खान सर जी, नमस्कार! आशा है स्वस्थ प्रसन्न होंगे। कभी आपसे मिलना तो नहीं हुआ पर यूट्यूब पर और अन्य मीडिया के माध्यम से आपके बारे में काफी कुछ जानता हूं।
आपका सामान्य ज्ञान की व विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कराने का अभ्यास और फिर टेक्नॉलॉजी और अपनी विशिष्ट शैली के साथ सारे बिहार ही नहीं देशभर के युवाओं को आपने बहुत प्रेरित प्रशिक्षित भी किया है।उन्हें परीक्षाओं में उत्तीर्ण कराने में आपने बड़ी भूमिका निभाई है। आपको इस सारे का साधुवाद।मेरे मन में आपके प्रति काफी प्रेम है और इसीलिए यह पत्र भी लिख रहा हूं।
किंतु 10 दिन पहले पटना व बिहार के अन्य स्टेशनों पर जो उग्र प्रदर्शन हुए,रेलगाड़ियां जलाई गईं, तोड़फोड़ हुई उससे न केवल आहत हूं,बल्कि आपके और वहां के अन्य 8-10 ट्यूशन सेंटर के संचालकों के बयानों ने बड़ी समस्या खड़ी कर दी।
माना कि रेलवे की परीक्षा को दो भागों में नहीं होना चाहिए था,यह एक बात है और भी कुछ ईशु थे जो उचित थे। जैसे परिणाम में बिना बात के देरी करना…आदि।किन्तु हिंसक प्रदर्शन किसके हित में है?हाँ आपने 27 जनवरी को बंद के विरूद्ध बयान देकर बहुत उत्तम काम भी किया।
लेकिन मैं दूसरी बात कहना चाहता हूँ वह यह कि पटना की भिखना पहाड़ी के इलाके में विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कोई 4 लाख विद्यार्थियों में से कितनों के नौकरी के सपने साकार होते हैं?केवल 10%के,या उससे भी कम।
उधर बेंगलुरु को देखो!जहां 4लाख बिहार के लड़के लड़कियां विभिन्न स्टार्टअप्स में या आईटी कंपनियों में काम कर रहे हैं।आप पटना को बेंगलुरु बनाने का क्यों नहीं सोचते? पटना को उद्यमशीलता का, नौकरियां देने वालों का सेंटर बनाने की बजाए नौकरी मांगने वालों का सेंटर बना रखा है। जरा सोचिए!
कुछ परिवर्तन करिए! आप लोग कर सकते हो। उन्हें जॉब सीकर की बजाय जॉब प्रोवाइडर बनाने की ट्यूशन दो। तुम्हारे कोचिंग सेंटर अब एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के सेंटर बनने चाहिएं। नए स्टार्टअप्स, FPOs खोलने के सेंटर बनने चाहिए।
तो खान सर,जरा आत्मचिंतन करो! और इन बच्चों को जो आप पर बड़ी श्रद्धा रखते हैं उस श्रद्धा को ठीक प्रतिसाद दो और इन युवाओं का व देश का भला करने की सोचो। तुम्हारा ~सतीश कुमार
नीचे:आज नागपुर के पास गढ़चिरौली में गोंडवाना विद्यापीठ के आमंत्रण पर विद्यार्थियों, अध्यापकों को उद्यमिता स्वरोजगार पर संबोधित किया।