…और अपनी भारत माता अब विश्व जननी भी बन गई है!
अपनी भारत माता अब विश्व के करोड़ों लोगों को भी खिलाने पिलाने लगी है।आपको पता है?
भारत विश्व का सबसे अधिक खाद्यान्न निर्यात करने वाला देश बन गया है। भारत की धरती अपनी 140 करोड़ जनता के लिए तो खाद्य सामग्री पैदा कर ही रही है,अब विश्व की भूख भी भारत की धरती मिटा रही है।
इस वर्ष विश्व के कुल चावल निर्यात का 48% अकेले भारत से हुआ है। यही नहीं गेहूं निर्यात में इस वर्ष 273% की वृद्धि के साथ विश्व का 24% गेहूं अब भारत भेज रहा है।
विश्व की जनता चावल गेहूं के बाद सबसे अधिक मछली खाती है। उसमें भी भारत इस वर्ष 542 अरब रुपए का मछली निर्यात कर रहा है।दुग्ध उत्पादन में तो भारत विश्व में सर्वप्रथम पहले ही बन चुका है।
यही नहीं इस वर्ष 300 अरब रुपए के मसालों का निर्यात भारत से हुआ है।तो 272 अरब रुपए के दालें। भारत का कुल कृषि निर्यात इस वर्ष 3750 अरब रुपए से अधिक का रहा है जो कि एक रिकॉर्ड है।
यूक्रेन युद्ध के कारण से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं चावल के दाम अच्छे मिलने से भारत के किसानों को भी बहुत फायदा हो रहा है।
याने संपूर्ण विश्व की जनता का उदर पोषण का बड़ा कार्य भारत की धरती कर रही है।इसीलिए तो बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1892 में ही लिखा था “सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम शस्य श्यामला मातरम वंदे मातरम…
अभी विश्व को भी उद्घोष करना पड़ेगा “भारत माता की जय, भारत माता की जय भारत माता की जय!”
नीचे: आज उज्जैन से इंदौर जाते हुए असंख्य नर नारियों को 118 किलोमीटर की महाकाल परिक्रमा पर पैदल जाते हुए देखा।धूप, गर्मी पर मुस्कुराते पंचकोसी पदयात्री प्रेरणा देते हैं…आस्था की जय जय कार!