…और वह घर-घर दूध बेचने वाला आज दे रहा है 3000 लोगों को रोजगार!!
आज संबलपुर उड़ीसा में स्वावलंबी भारत अभियान की बैठक चल रही थी मैं बोल रहा था “उद्यमिता ही चाबी है, सफ़लता की। आपकी पढ़ाई कम हो, आपके पास भले ही ₹40..50000 हो तो भी आप बड़े उद्योजक बन सकते हैं।
तभी सामने बैठे कार्यकर्ताओं में से एक उत्साह से खड़ा हो गया “सतीश जी! आप कहें तो मैं अपनी बात सबको बताना चाहता हूं।” मैंने तो हां कहना ही था।
फिर उसने बताया “मैं 12वीं में पढ़ रहा था, जब मेरे पिताजी का देहांत हो गया। घर का खर्च चलाने के लिए मुझे घर-घर दूध बेचने का काम करना पड़ा। क्या करते? बाद में मैंने एक ट्रैक्टर कंपनी में नौकरी की केवल ₹700 मासिक पर। फिर मैंने सोचा कि बड़ा बनना है तो कुछ अपना काम करूं?”
और मैंने इधर उधर से ₹50000 इकट्ठे करके एक विद्यालय शुरू कर दिया। धीरे-धीरे दो पार्टनर मिलाए,दिन रात मेहनत की। आज मेरे सारे उड़ीसा में विद्यालय व अस्पताल चलते हैं।उनमें कुल 3000 कर्मचारी काम करते हैं।” वह उत्साह में लगातार बोलता रहा।
“मैंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी, रिस्क लेता गया, मेहनत करता गया,मेरा काम बनता गया।”
बाद में सब ने कहा कि हां! यह 100% ठीक कह रहे हैं।आज इनका सारे उड़ीसा में बड़ा नाम हो गया है। मुझे आश्चर्य हुआ की ऐसी सफल गाथा हमारे कार्यकर्ताओं की ही है।
नीचे: इसी बैठक में कार्यकर्ताओं से बात करते हुए