#स्वदेशीचिट्ठी
…और सवेरे सवेरे मैंने किया बड़े फायदे का सौदा!!
आज सवेरे 5बजे मैं दिल्ली से भुवनेश्वर की फ्लाइट लेने के लिए निकला।
जो ओला का ड्राइवर आया वह कुछ बुडबुड़ा रहा था मैंने कहा “क्या हुआ?” तो कहने लगा “अरे क्या करें, भाई साहब?यह कंपनी वाले जीने ही नहीं देते?” अभी देखो सवेरे 5:00 बजे हैं किंतु मुझे ₹150 से अधिक नहीं मिलेंगे? बाकी 33..35% तक तो ओला कंपनी वाले ही ले जाते हैं। दो बच्चे हैं मेरे,कैसे चलाएं घर”
खैर मैंने उतरने से पूर्व उससे और कई बातें पूछी। कब से गाड़ी चलाते हो, तुम अगर औला से अलग अपनी इंडिपेंडेंट सवारी लेने पर क्या फर्क पड़ेगा?इसके अलावा भी क्या किया जा सकता है? हमने आपस में बात की।
लेकिन जब उतरा तो मैंने उसके पैसों के अलावा उसको ₹20 पकड़ा दिए। वह आश्चर्य से पूछने लगा “यह कैसे? मैंने कहा “दोनों बच्चों की एक एक चॉकलेट के लिए।”
जैसे ही मैंने कहा,वह अपनी सीट से उठा और मेरे पैर छूने लगा। मैंने मना किया।लेकिन उसके चेहरे पर खिली मुस्कुराहट ₹2000 से कम की नहीं थी।
मैंने सोचा ₹20 देकर 2000 की मुस्कुराहट ली। कितना बड़ा फायदे का सौदा किया मैंने?
नीचे:आज भुवनेश्वर में स्वदेशी जागरण मंच की एक बैठक में बात करते हुए।