“…नहीं! मैं नहीं देख पाऊंगा, द कश्मीर फाइल्स!”
परसों कर्णावती(गुजरात) में संघ की बैठक संपन्न हुई। हम कमरे पर आए और कश्मीरी लाल जी अपना सामान समेटते रहे हुए बोले “सतीश जी! द कश्मीर फाइल फिल्म तो देखनी पड़ेगी। यह बड़ा विषय उभर रहा है।”
मैंने तुरंत कहा “हां हां क्यों नहीं? तानाजी मालुसरे इकट्ठे देखी थी उसके बाद यह भी देखेंगे।”
कल फिर मैंने इसका यूट्यूब पर ट्रेलर देखा। फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री, उसकी पत्नी पल्लवी जोशी, अनुपम खेर आदि के इंटरव्यू देखे, सुने। फिर रुचि बढ़ी तो मैंने इस फिल्म के कुछ छोटे हिस्से (टीजर)देखें।वे इतने संवेदनशील थे कि उसको देखते हुए ही मेरे आंखों से आंसू निकल पड़े और मैं अब इस फिल्म को पूरी देखने के नाम से ही संकोच में हूं। मुझे नहीं लग रहा कि मैं यह फिल्म पूरी देख पाऊंगा।
मैं जम्मू कश्मीर में प्रचारक रहा हूं। इन सब कथाओं को कई बार सुन चुका हूं। स्वयं मेरे पिताजी पश्चिमी पंजाब(आज के पाकिस्तान) के रहने वाले थे।अनुपम खेर ने रोते हुए अपने मामा के द्वारा बनाए घर छोड़ने के बारे में बताया तो मेरी मां ने भी मुझे बताया था कि कैसे वह गली में खेलते हुए मेरे छोटे मामा को उठाकर भागी थी,जब पाकिस्तान से निकलना था। मेरे पिताजी ने,मां ने नानी ने 1947 के विभाजन के समय पर जो दर्द झेला,उसकी सैकड़ों कहानी मुझे बचपन में सुनाई हुई हैं।
मैं सोचता हूं “अगर अनुपम खेर अपनी व्यथाएँ बताते हुए रो रहे हैं, तो मैं कहां अपने आंसू रोक पाऊंगा? लेकिन एक संकल्प पक्का है,कश्मीर का प्रश्न तो काफी कुछ सुलझा ही लिया है, अब पाक अधिकृत कश्मीर ही नहीं पूरा पाकिस्तान ही फिर से वापस लेना होगा। वह हमारी भूमि है, हमारे पूर्वजों की भूमि है।। मेरे बाप दादा वहीं जन्मे पले। किन्ही जेहादी दरिंदों को इसका अधिकार नहीं है कि वह मेरे पूर्वजों की भूमि पर राज करें। देखते हैं कैसे होगा? किंतु एक दृढ़ निश्चय है कि यह होगा और अपनी आंखों के सामने ही होते देखेंगे।
किसी को नहीं लगता था की धारा 370 हटेगी। नहीं लगता था राम मंदिर बनेगा,ट्रिपल तलाक समाप्त होगा…पर सब हुआ है।
अभी यह नहीं लगता पाक अधिकृत कश्मीर, व पंजाब के वे हिस्से जो पाकिस्तान के कब्जे में हैं, वे भारत में कभी आ सकते हैं। पर यह भी होगा।अगले 15-20 वर्षों का देश का यही संकल्प है। हर हर
महादेव~सतीश कुमार