भारत को चाहिए 739 श्रीधर वैंबू
5 दिन पहले मैं तमिलनाडु के प्रवास के समय तेन काशी गया, जहां श्रीधर वैंबू जी ने अपना चेन्नई के बाद दूसरा केंद्र बनाया है। जोहो एक अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी है। श्रीधर वैंबू जी ने इसे पहले अमेरिका कैलिफोर्निया में शुरू किया।बाद में 10 वर्ष पूर्व उन्होंने उसका हेड क्वार्टर चेन्नई में बनाया और अब तमिलनाडु के छोटे जिले तेनकाशी से वे सारा नियंत्रण करते हैं। उनकी कंपनी जोहो में लगभग 12,000 लोग रोज़गार पा रहे हैं।
मैंने वहां पर अनेक युवकों व युवतियों से बातचीत की।एक युवक ने बताया “मैं केवल प्लस टू पास हूं। यहां 8 महीने का कोर्स करके यही नौकरी लग गया हूं, ₹18000 ले रहा हूं, रोज अपने गांव चला जाता हूं”
दूसरी एक लड़की मिली उसने बताया “मै पॉलिटेक्निक पास हूं 6 महीने का यहां कोर्स करने के बाद यही टीचर लग गई हूं। मुझे जिंदगी बहुत सुखद लगती है,शाम को स्कूटी पर अपने घर चली जाती हूं।”
जोहो ने ऐसे सैंकड़ों युवा युवतियों को रोजगार दिया है।इससे तेनकाशी जिले के बाकी लोगों की भी आय में वृद्धि हो गई है।श्रीधर वैंबू 700 करोड रुपए की सालाना इनकम टैक्स देकर तमिलनाडु के सबसे बड़े आयकर दाता बने हैं।वे स्वयं इतने साधारण वेशभूषा में रहते हैं की मै स्वयं अचंभित था।
वहां मैंने श्रीधर वैंबू जी व स्वदेशी के राष्ट्रीय संयोजक सुंदरम जी से भारत में आई टी के विस्तार v भारत को रोजगार वा समृद्ध अर्थव्यवस्था बनाने के अनेक पक्षों पर चर्चा की।रात्रि उनके गांव में ही रहा।
सवेरे जब वहां से चला तो मैंने सुंदरम जी से कहा कि भारत के 739 जिले हैं भारत हर एक में एक श्रीधर वैंबू हो जाए तो बस जय जय कार हो जाए नीचे श्रीधर वैंबू और सुंदरम जी वाह संगठक सत्यनारायण जी के साथ