…रोजगार देने वाली एजेंसी या कंपनी नहीं है सेना!!
आज बेंगलुरु में हूं।स्वावलंबी भारत अभियान की क्षेत्रीय कार्यशाला कल संपन्न हुई है।आज ही मैंने अग्निवीर योजना के बारे में अनेक लेख पढ़े।
अपने पूर्व सेना अध्यक्ष, वर्तमान में केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने जो वक्तव्य दिया की “सेना कोई कंपनी, दुकान या रोजगार एजेंसी नहीं है कि हमें रोजगार चाहिए, इसलिए सेना में भर्ती हुआ जाए।” पढ़कर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
मैं सोच में था कि क्या विपक्षी दलों को इस बात का पता नहीं है की सेना का पेंशन का बिल ही उसके द्वारा खरीदे जाने वाले हथियारों से अधिक है।
आज आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का युग है। राकेट, मिसाइल, ड्रोन से आगे की लड़ाई होनी है। न कि 50 साल पुराने तरीके से, जहां पैदल सेना ही निर्णायक होती थी। सोचने की बात है कि हमें देश की सुरक्षा वाली आधुनिकतम हथियारों से सुसज्जित सेना चाहिए या केवल रोजगार देने के लिए पुरानी प्रक्रिया की भर्ती?फिर सेना को युवा, देशभक्ति के जज्बे से भरपूर जवान विजय दिलाते हैं।
जो कहते हैं कि चार साल के अनुभव हीन क्या युद्ध लड़ेंगे,वे एक उदाहरण ध्यान रखे। द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटेन की हालत खराब थी।उसने तुरंत 20 लाख युवा भर्ती किए,4 महीने के छोटे प्रशिक्षण के बाद ही उन्होंने रूस,जापान की विजई हो रही सेना को धूल चटा दी।
निश्चित रूप से यह कड़ा निर्णय है।किंतु अत्यंत आवश्यक है।
हां!आनंद महिंद्रा जैसे सकारात्मक लोग भी अभिनंदनीय हैं, जिन्होंने कहा की “अग्नि वीरों को महिंद्रा एंड महिंद्रा अपने यहां काम देगी।”
निकम्मे विपक्षी दलों को और किसी से नहीं तो कम से कम आनंद महिंद्रा से ही सबक लेना चाहिए। लेकिन देश को घबराने की आवश्यकता नहीं, किसान बिल जैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है। विपक्षी दल औंधे मुंह गिरेंगे। अगले सप्ताह से ही इस योजना का अभिनंदन प्रारंभ हो जाएगा।~सतीश कुमार
नीचे:संघ के पांचवे सरसंचचालक मा: सुदर्शन जी,जिनका परसों जन्मदिन था।भारतीय सेना(प्रतीक फोटो) आनंद महिंद्रा के साथ।