विदेश में आईटी की बड़ी नौकरी छोड़कर चाय बेचना शुरू किया, अब है करोड़पति।
कल मैं भाग्यनगर(हैदराबाद) में था।वहां स्वावलंबी भारत अभियान की प्रांतीय कार्यशाला थी।कई उद्यमी आकर अपनी गाथा सुना रहे थे।
उसी में एक उदय श्रीनिवास आए और बोले “मैं आईटी इंजीनियर हूं।दुबई की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी करता था। वैसे वेतन अच्छा था। किंतु मेरे मन में अपने देश वापस आने और अपना ही कोई बिजनेस करने की सोच शुरू से थी।”
मैंने यहां आकर Tea Time’ नाम से विभिन्न स्वाद की चाय बेचने का एक स्टॉल शुरू किया।घरवालों को यह बिल्कुल पसंद नहीं था पर मेरे मनाने पर वह मान गए।”
“5 लाख रुपए लगाकर मैंने काम शुरू किया। पहले अपना काम जमाया। जब चल निकला तो मैंने फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाकर दूसरे स्टॉल खोलने शुरू किए।”वो लगातार बता रहे थे।
मैंने पूछा “अब क्या स्थिति है, देश भर में तुम्हारे कितने आउटलेट हैं?”
उसने कहा “अब मेरे सारे देश में 3000 आउटलेट हैं और वार्षिक टर्नओवर भी 280 करोड़ का है।मेरे दफ्तर में ही 45 लोग काम करते हैं और अगर एक स्टॉल में तीन का भी हिसाब लगाएं तो 45000 लोग मेरे इस उद्यमशीलता के विचार से अपना रोजगार पा रहे हैं।”
मैंने उसे वहां पर सबके बीच में सम्मानित किया। “वास्तव में उद्यमिता से ही मनुष्य अपनी पूरी क्षमताओं का विकास कर पाता है,नौकरी से नहीं।”~सतीश कुमार
नीचे:स्वावलंबी भारत अभियान भाग्यनगर कार्यशाला के कुछ चित्र