#सेवा भारती के सेवा कार्य…धन्य धन्य!
आज दक्षिण भारत का प्रवास पूर्ण हो रहा है। मदुरई, कन्याकुमारी, त्रिवेंद्रम आदि में जो सेवा कार्यों का दर्शन हुआ,उसके लिए एक ही शब्द है…धन्य धन्य! मदुरई में सक्षम व सेवा भारती ने मिलकर एक प्रज्ञा चक्षुओ के लिए कंप्यूटर केंद्र चलाया है।9 विद्यार्थी वहां पर थे और वे सभी आशान्वित है कि अपनी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें कोई काम भी मिल जाएगा। उनका विश्वास व उत्साह देखकर मैं चकित था।
वही उसी के नीचे विकलांग बच्चों का एक विद्यालय सेवा भारती द्वारा चलता है(सक्षम भी अपना ही संगठन है,जो विकलांगो हेतु है)
मैंने पूछा “कौन चलाता है?
तो बताया “हाई कोर्ट के एक जज हैं,उनकी पत्नी जो पुरानी स्वदेशी व सेविका समिति की कार्यकत्री भी है अब वह सक्षम की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है,वह चला रही हैं।बाद में उस देवी से भी मिलकर आया।
जब कन्याकुमारी पहुंचा तो वहां 1200 से अधिक सेल्फ हेल्प ग्रुप, अस्पताल का सेवा केंद्र और वृद्ध आश्रम देखा। गहन पूछताछ की शुद्ध सेवा भाव के अलावा और कुछ नहीं, फ़ोटो तक की इच्छा नहीं। वहां एक फौजी मिला वह अंग्रेजी भी बोलता था मैंने उससे संवाद किया उनकी प्रसन्नता, सकारात्मकता देखकर मैं भाव विभोर हो गया।वहां की माताओं का आशीर्वाद लेकर निकला तो सेवा भारती के अपने कार्यकर्ताओं को नमन करने के अलावा मेरे मन में और क्या भाव रहता?
यही केरल में भी देखने को मिला।मैंने स्वदेशी के संगठक श्रीजीत से पूछा कि केरल में संघ के अलावा सबसे प्रभावी काम किसका है?
तो वह बोले “सेवा भारती का।”
धन्य है वे कार्यकर्ता जो बहुत सीमित संसाधन के होते हुए भी इतना सेवा कार्य कर रहे हैं और इन केंद्रों में जहां पर पहले ईसाई ही सेवा का प्रतीक थे, पर करते थे धर्मांतरण।अब सेवा भारती ने सब ठीक कर दिया है।
नीचे: कन्याकुमारी का वृद्ध आश्रम व मदुरै का दिव्यांग कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र,वहाँ अछि दोस्ती की सबसे