स्वाभिमान पूर्वक उभरता भारत!
आजकल राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर छाए हुए हैं।कारण है कि उन्होंने गत छह आठ महीनों में लगातार देश का सीना गर्व से भरपूर करने वाले लगातार वक्तव्य दिए हैं।
वे अमेरिका गए थे वहां के विदेश मंत्री ने पत्रकार वार्ता में कह दिया “भारत में मानवाधिकार उल्लंघन पर अमेरिका की नजर है,ज्यादा गड़बड़ हुई तो हम दखल देंगे।”
अगले ही दिन जय शंकर जी ने भी वक्तव्य दे दिया “अमेरिका के मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत की नजर है।” यह आज तक की परंपरा के विपरीत था। कि कोई अमेरिका में जाकर अमेरिका को ही उसी की भाषा में उत्तर दे।
ऐसे ही जब एक पत्रकार ने पूछा कि “भारत रूस से तेल क्यों ले रहा है?” तो जयशंकर ने तुरंत उसे झीड़कते हुए कहा “जितना यूरोप एक दिन में तेल रूस से लेता है, उतना तो हम 1 महीने में भी नहीं लेते, तुम हमें उपदेश मत दो।”
इससे पहले जब चीनी विदेश मंत्री आए थे तो उन्हें भी जयशंकर ने साफ कहा “जब तक चीन सीमा पर गड़बड़ी बंद नहीं करता तब तक हमारे संबंध सामान्य नहीं हो सकते और चीन का विस्तार वादी दृष्टिकोण ही सब समस्याओं की जड़ है।”और मोदी जी ने तो चीनी विदेश मंत्री से मिलने तक से मना कर दिया।
और केवल जयशंकर ही नहीं भारत वास्तव में अब दासता की मानसिकता से पूरी तरह निकल आया है। इसलिए हर क्षेत्र में भारतीय लोग स्वाभिमान से अपनी विश्व भूमिका निभाने में लगे हैं। गत दो मास में ही विश्व के 25 विदेश मंत्री या वरिष्ठ राजनयिक भारत होकर गए हैं।नेपाल हो या श्रीलंका भारत बड़े भाई की भूमिका भी निभा रहा है।जय स्वदेशी…जय भारत।
नीचे : चित्तौड़ प्रांत की भीलवाड़ा में स्वावलंबी भारत अभियान को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला की फ़ोटो