हे राष्ट्रऋषि!शत-शत वंदन!
एक पत्र श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के नाम!
परम आदरणीय दत्तोपंत जी! सादर प्रणाम।
वैसे सामान्य जन आश्चर्य करेगा कि स्वर्गवासी व्यक्ति को पत्र कैसे लिखा जा सकता है? किंतु हम जानते हैं आप भौतिक रूप से भले ही 14 अक्टूबर 2004(आज के ही दिन) को चले गए किंतु आप आज भी जीवित हैं, सूक्ष्म रूप से, हजारों नहीं लाखों भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ,स्वदेशी जागरण मंच,व संघ के कार्यकर्ताओं के मन में, हृदय में, विचारों में।
आप 1942 में नागपूर से संघ के प्रचारक बने।कानून की पढ़ाई करके, उस समय केरल गए जब संघ को कोई जानता नहीं था। सब तरफ हिंदुत्व विरोधी वातावरण था। फिर आपने 1955 में भारतीय मजदूर संघ,1979 में भारतीय किसान संघ व 1991 में स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना की।एक एक प्रसंग लिखना तो यहां कठिन है,किंतु आप का रोम-रोम इस देश के मजदूर, किसान, गरीब व बेरोजगार के लिए धड़कता था।
आज हम आप को श्रद्धांजलि देते हुए यह संकल्प करते हैं,कि इस देश को पुनः एक उन्नत अर्थव्यवस्था, शोषण मुक्त अर्थव्यवस्था व पूर्ण रोजगार युक्त युवाओं वाला देश बना कर ही रहेंगे।
आप की प्रेरणा से यह तीनों संगठन और उसके हजारों कार्यकर्ता दिन रात लगे हुए हैं।
आपने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मकड़जाल के विरुद्ध देश को जगाया।हम भी उस विषय पर आगे बढ़ रहे हैं।आपने 40 से अधिक पुस्तकें लिख कर और हजारों उद्बोधनों द्वारा जो वैचारिक धन हमें दिया, उसे बढ़ाने में आपके कार्यकर्ता लगे हुए हैं।आप निश्चिंत होकर ईश्वर के साथ निमग्न रहें।
आपने हमें इस पथ पर चलने की प्रेरणा भी दी और रास्ता भी दिखाया।इसके लिए हम स्वदेशी के लाखों कार्यकर्ता आपको हृदय की गहराई से नमन करते हैं।
~आपके स्वदेशी कार्यकर्ता
नीचे:आज केंद्रीय कार्यालय में कश्मीरी लाल जी, अश्वनी जी बलराज जी व अन्य, श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए।