गरीब आदमी ज्यादा सुखी होते हैं या अमीर?
कल मैं कन्याकुमारी में हमारे सेवा भारती द्वारा चल रहे सेल्फ हेल्प ग्रुप का अध्ययन करने गया।
25..30 महिलाओं का समूह था। वह हिंदी नहीं समझती थीं, मैं तमिल बोल नहीं सकता। किंतु मन की भाषा दोनों समझते थे तो 2 घंटे लंबा संवाद हुआ।
सारी बातें पूछने के बाद मैंने पूछा “आपकी पूरे परिवार की कमाई मिलाकर 9000 से अधिक नहीं है फिर भी आप सुखी हैं?”
तो सब एक स्वर में बोले “हां! हां! सुखी हैं!”
मैंने कहा “कोई शिकायत किसी से, सरकार से?”
“नहीं कोई शिकायत नहीं। आप आते रहिए बस और कुछ नहीं चाहिए।” उनकी मुस्कुराहट आत्मीयता देख कर मैं स्वयं हैरान था।
इधर दिल्ली में कुछ दिन पहले एक पति पत्नी मिलने आए उनकी इनकम चार लाख प्रति मास होगी किंतु 40..45 मिनट में वे अपने दुखों की गाथा ही बताते रहे।
मेरा अनुभव है कि जितने अधिक संपन्न लोग मिलते हैं उनकी शिकायतें व दुख अधिक होते हैं यद्यपि मैं इस विषय पर अभी निश्चित नहीं, तो सोचा स्वदेशी चिट्ठी के पाठकों की राय लूं,आपका क्या कहना है? कौन अधिक सुखी रहता है?~सतीश कुमार
नीचे: कन्याकुमारी में सेवा भारती की महिलाओं के साथ चर्चा करते हुए