40-45 वर्षों से वही स्नेह,आत्मीयता!
रक्षाबंधन उत्सव है ही कुछ ऐसा!..क्यों?
इस 22 तारीख को जब मैं सोनीपत में बड़ी बहन दीक्षा जी के घर राखी बंधवाने पहुंचा, तो मैं सोच में था,कि जब 40 साल पहले मैं 17 साल का था और वह 19 की, तब जो राखी बंधवाने का उत्साह रहता था वह आज तक भी बना हुआ है। वह नानी बन गई है सेवानिवृत्त हो गई है।मैं भी 57 वर्ष का,अब स्वदेशी के अखिल भारतीय दायित्व पर आ गया हूं।फिर भी स्नेह में,आत्मीयता में तो कोई कमी नहीं।यह रिश्ता है ही ऐसा।🌷
फिर मेरा जन्मदिन वास्तव में तो रक्षाबंधन वाले दिन होता है। अंग्रेजी तिथि 25 अगस्त है। बहुत से बंधुओं ने शुभकामनाएं facebook whatsapp,sms,phone द्वारा भेजीं,उन सबको बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सब मिलकर राष्ट्र कार्य में लगे रहें, यही ईश्वर से प्रार्थना👏। जय स्वदेशी-जय भारत~सतीश
नीचे:बड़ी बहन दीक्षा जी राखी बांधते हुए, साथ में छोटा भाई अश्वनी,देखते हुए।