एक चिट्ठी डोनाल्ड ट्रंप के नाम!

#स्वदेशीचिट्ठी..एक चिट्ठी डोनाल्ड ट्रंप के नाम!
अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप जी,सादर नमस्ते 🙏
आप 8 महीने पहले अमेरिका के राष्ट्रपति बने,वहां की जनता को यह वादा करके कि आप महंगाई को काबू करेंगे, अमेरिका की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालेंगे और अमेरिका को महान देश बनाएंगे। लेकिन गत आठ महीनो में आपके प्रतिदिन के वक्तव्य, घोषणाओ से न केवल अमेरिका की जनता परेशान हो गई है बल्कि विश्व भर में आपने अमेरिका के मित्रों को दुश्मन बना लिया है और दुश्मनों को कट्टर दुश्मन। कोई भी राष्ट्रपति ऐसा नहीं बोलता जैसा प्रतिदिन आप गाली गलौज पर उतर आते हैं।
किसी भी देश पर टैरिफ लगाने को आप आर्थिक मिसाइल के नाते से किसी भी देश पर छोड़ते रहते हैं। आपने न अपने मित्र देश, यूरोप को छोड़ा न जापान,कनाडा,मेक्सिको को और भारत के प्रति तो आपने दुश्मनों जैसा रवैया अपना लिया और 50% के टैरिफ लगा दिए।
पिछले सात आठ अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने धैर्य पूर्वक भारत के साथ बहुत मधुर संबंध बनाए थे। आप ऐसे एहसान फरामोश है कि आपका पहले कार्यकाल के अंतिम दिनों में जब हमारे मोदी जी वहां गए तो वहां पर “अगली बार..ट्रंप सरकार” के नारे तक लग गए।किंतु आप भारत को और मोदी जी के विरुद्ध कुछ न कुछ रोज बोलते हैं। आज 8 महीने बाद अमेरिका में आपकी लोकप्रियता बुरी तरह से गिरी हुई है।विश्व भर में आपको एक अहंकारी और गैर जिम्मेदार नेता के रूप में देखा जा रहा है।
पर आपके इस भारत और विश्व विरोधी रवैया के कारण से ही चीन रूस और भारत का संबंध फिर बन गया है। आज अमेरिका अलग-अलग पड़ गया है। “एक कॉल पर यूक्रेन रूस युद्ध रुकवा दूंगा” कहने वाले आप 8 महीने बाद हताश खड़े हैं और जेपी मॉर्गन और UBS जैसे नामी अमेरिकी बैंकों ने शोध किया है कि 93% यह संभावना है कि अमेरिका 2025 के अंत में मंदी की चपेट में आ जाए। दुनिया भर को अल्टीमेटम देकर अपने हित के व्यापार समझौते करवाने से, हो सकता है कुछ देश डर जाएं, और कुछ बिलियन डॉलर आप इस दादागिरी में से इकट्ठे कर लें,लेकिन यह अमेरिका की प्रति सारे विश्व के क्रोध और नफ़रत लेने की कीमत पर होगा। अभी भी वक्त है,आप परिवर्तन करें और अपना ट्रैक बदलें।
अमेरिका की कोर्ट ने आपके टैरिफ और अन्य घोषणाओं को गैरकानूनी घोषित किया ही है।जहां तक रही भारत की बात तो भारत तो 145 करोड़ का बाजार है,हमने अब स्वदेशी का मार्ग अपना लिया है हम तो 7% जीडीपी की दर से बड़े ही रहे हैं,बढ़ते रहेंगे। एक बड़े संपन्न देश अमेरिका को मंदी में डालकर, अभी तक के सबसे फेल राष्ट्रपति क्यों बनना चाहते हो?परमात्मा आपको सद्बुद्धि दे।
भारत विश्व भर में तेजी से उभरता हुआ देश है, हम तो निकल ही जाएंगे। अमेरिका ने 1987 में हमें क्रायोजेनिक इंजन नहीं दिया तो हमने 2 वर्ष में ही अपना बना लिया, आपके देश ने 1998 में हमारे पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जब अटल जी के समय हमने परमाणु विस्फोट किया पर 6 महीने बाद अमेरिका ने हार कर वापिस ले लिए।हम अब इतने बड़े हैं कि आपके इन टैरिफ का हमारे ऊपर कुछ खास होना ही नहीं है लेकिन अच्छा है हमारा मित्र देश अमेरिका और आप अहंकार से उभरें इसी में आपकी भलाई है,हम तो जय स्वदेशी जय भारत के मार्ग पर हैं ही।जरा सोचिए~ सतीश
नीचे:आज अजमेर में राष्ट्रीय संयोजक सुंदरम जी,संगठक कश्मीरी लाल जी व अन्यों के साथ डी ए वी महाविद्यालय में कार्यकर्ताओं को स्वदेशी संकल्प करवाते हुए।

दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहलाता है कोयंबटूर! इस शहर ने 7 लाख से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया हुआ है। अकेले कोयंबटूर की जीडीपी 50 अरब डॉलर है जबकि सारे श्रीलंका की जीडीपी 80 अरब डॉलर है।"भारत का प्रत्येक महानगर कोयंबटूर बन जाए तो भारत की बेरोजगारी भी खत्म हो जाएगी।

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