केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन के ऑफिस ने कहा कि पर्याप्त वेंटिलेशन Covid-19 वायरस को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसने महामारी से लड़ने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। विजयराघवन ने हाल ही में ट्वीट किया था कि वैक्सीनेशन हो या न हो, महामारी को खत्म करने के तीन सिद्धांतों को नहीं भूलना चाहिए, जो कि मास्क, फिजिकल डिस्टेंसिंग और वेंटिलेशन है।

गाइडलाइन ने कहा, ” अच्छे वेंटिलेशन के जरिए एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के ट्रांसमीट होने की आशंका कम रहती है।” प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने भी एक महत्वपूर्ण बिंदु बताया कि बूंदों के रूप में बड़े आकार की लार और नाक से डिसचार्ज जमीन पर और सतहों पर गिरते हैं और एरोसोल हवा में 10 मीटर तक जा सकता है।

Covid-19 के नए दिशानिर्देश-

– एरोसोल और ड्रॉपलेट्स के जरिए वायरस तेजी से फैलता है। एरोसोल को हवा में 10 मीटर तक जा सकता है।

– दिशानिर्देशों में आगे कहा गया है कि पंखे का स्थान भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंखा ऐसी जगह पर नहीं होना चाहिए, जहां से दूषित हवा सीधे किसी और तक जा सके।

– यदि किसी कमरे की खिड़कियां और दरवाजे बंद हैं, तो एग्जॉस्ट पंखे चलते रहने चाहिए। इसमें कहा गया, “एक एग्जॉस्ट फैन या एक पेडस्टल पंखे को बाहर की ओर मोड़कर रखें, ताकि अंदर की हवा में संक्रमण के कणों के बाहर निकाला जा सके।”

– दफ्तर और घरों में वेंटिलेश के संदर्भ में सलाह दी है कि सेंट्रल एयर मैनेजमेंट सिस्टम वाली बिल्डिंगों में सेंट्रल एयर फिल्टर में सुधार करने से काफी मदद मिल सकती है।

– संक्रमित व्यक्ति के सांस छोड़ने, बात करने, बोलने, गाने, हंसने, खांसने या छींकने आदि के दौरान लार और नाक के जरिए ड्रॉपलेट्स और एरोसोल बन सकते हैं, जो वायरस को फैला सकते हैं।

– संक्रमित व्यक्ति के 2 मीटर के दायरे में ड्रॉपलेट्स गिरते हैं।

– यहां तक ​​​​कि एक संक्रमित व्यक्ति जिसमें कोई लक्षण नहीं दिखा रहा है, वह भी “वायरल लोड” बनाने के लिए इतनी ड्रॉपलेट्स को छोड़ सकता है, जो किसी दूसरे को संक्रमित कर सकती हैं।