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कोरोना वायरस के कारण दूसरे प्रदेशों से वापस लौटे लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट रोज़गार है. सभी के मन में चिंता है कि यह सब कब तक चलेगा और क्या वह उत्तराखंड में कमा-खा सकेंगे या फिर उन्हें परदेस के धक्के खाने पड़ेंगे. ऐसे लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं धौलादेवी ब्लॉक के चमुवा के हुकुम सिंह.

कभी दिल्ली में नौकरी करने वाले हुकुम सिंह ने गांव लौटकर सब्ज़ी उत्पादन शुरू किया और जल्द ही उनकी लगन और मेहनत का परिणाम भी सामने आ गया. आज वह घर में ही 25000 रुपये महीने से ज़्यादा की आमदनी कर रहे हैं और उन्हें आशा है कि यह बढ़ेगी ही. हां, अब हुकुम सिंह का पलायन का कोई इरादा नहीं है.

ग्राम्य परियोजना का मिला सहारा 

2016 में दिल्ली से लौटे हुकुम सिंह का कहना है कि वह गांव लौटे थे तो उन्होंने घर में स्वरोज़गार करने की योजना बनाई थी. उनकी इस इच्छा को ग्राम्य परियोजना का सहारा मिल गया. इससे उन्हें पॉलीहाउस बनाने में मदद मिली और पहले ही सीजन में उन्होंने सब्ज़ियों का अच्छा उत्पादन किया. पहले सीज़न में उन्होंने 50000 रुपये से ज़्यादा की सब्ज़ियां बेचीं.

इसे देखते हुए उन्हें इसी परियोजना के तहत दूसरा पॉलीहाउस भी मिल गया. इसके बाद उन्होंने इन दोनों पॉलीहाउस के साथ ही बाहर की ज़मीन पर मौसमी सब्ज़ियां उगाना शुरु कर दिया. अब एक सीजन में एक पॉलीहाउस से वह 60 हज़ार से अधिक की बेमौसमी सब्जी बेच देते हैं. इस बार टमाटर के रेट अच्छे मिलने से तो और भी अधिक मुनाफ़ा होने की उम्मीद है.

 

Source Link: https://hindi.news18.com/news/uttarakhand/almora-by-growing-vegetables-at-home-this-farmer-of-almora-is-earning-better-than-his-job-in-delhi-ukrd-3169780.html