Our Story - Baggit

कुछ कमाओ और कुछ सीखो’ के मंत्र से अपने करियर की शुरुआत करने वाली इस लड़की के दिमाग में अचानक एक दिन एक आइडिया सूझा। उसे उस वक़्त बिल्कुल भी अहसास नहीं था कि यह आइडिया आने वाले वक़्त में उसे करोड़पति महिलाओं की फेहरिस्‍त में शामिल कर देगा। उन्होंने बस अपने आइडिया पर टाइम पास के तौर पर काम करना शुरू किया। आपको यकीन नहीं होगा, आज इस आइडिया से बनें प्रोडक्ट की सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में क्रेज है।

कभी आम सी दिखने वाली ये लड़की अब खास महिलाओं की फेहरिस्‍त में शामिल ‘बैगिट’ कंपनी की फाउंडर नीना लेखी हैं। मुंबई के एक संपन्न परिवार में पली-बढ़ी नीना बचपन से ही बिंदास प्रवृत्ति की इंसान थी। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली नीना ने कमर्शियल आर्ट में अपना भविष्य बनाने का निश्चय किया और इसी कड़ी में उन्होंने मुंबई के मशहूर सोफिया पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। क्लास के बाद मिलने वाले समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने ‘श्याम आहूजा’ के डिजाइनर शोरूम में नौकरी करनी भी शुरू कर दी। नीना का हमेशा से यही सोचना था ख़ुद के पैर पर खड़ा होना।

डिजाइनिंग शोरूम में काम करने के दौरान उन्हें एक खास आइडिया मिला। उन्होंने सोचा जैसे टीशर्ट पर कुछ स्लोगन लिखे होते हैं, क्यों न इसी तरह के स्लोगन लिखे बैग तैयार किए जाएं।

नीना ने बिना कोई उत्सुकता के टाइम पास के लिए बैग बनाने के अपने आइडिया पर काम शुरू किया। उसी डिज़ाइनर शोरूम में उन्होंने एक लिफ्टमैन और एक जिप ठीक करने वाले शख्स की मदद से सादे कैनवस से बैग बनाने शुरू किए। बैग बनकर तैयार होने पर उन्होंने अपने स्टोर के मालिक से इन्हें बेचने की इजाजत ले ली।

इसी दौरान उनकी मुलाकात अपनी सहेली के भाई मनोज से हुई। मनोज कपड़ों की प्रदर्शनी और सेल लगाया करते थे। उन्हें नीना के बनाए बैग बेहद पसंद आए और उन्होंने अपने सामान के साथ नीना के बैग बेचने का भी निर्णय लिया। नीना को उस समय एक बैग बनाने में लगभग 25 रुपए खर्च करने पड़ते थे। जबकि वह बाजार में इसे 60 रुपए में बेचती थीं। इस तरह से बैग बनाने का यह कारोबार पचास फीसदी से भी ज्यादे के मुनाफे करना शुरू कर दिया।

Baggit at Forum Celebration Mall Udaipur

नीना ने कुछ नए प्रयोग करने के उद्देश्य से सादे बैग की जगह कुछ एटीट्यूट वाले कोट लिखने शुरू कर दिए। इससे इस बैग को एक नई पहचान मिली और फिर ‘बैगिट’ का जन्म हुआ। नीना माइकल जैक्सन की बहुत बड़ी फैन हैं और उनकी बीट इट से प्रभावित होकर उन्‍होंने ‘बैगिट’ नाम से अपने व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की।

तीन साल के भीतर ही नीना के बनाए बैगों की बिक्री दस गुना बढ़ गई। इस शुरूआती सफ़लता से प्रेरित होकर नीना ने और तरह-तरह के बैग बनाने शुरू कर दिए। उन्होंने चमड़े के बैग भी बनाने की कोशिश की, लेकिन बदबू की वजह से उन्होंने जानवरों की खाल इस्तेमाल न करते हुए सिंथेटिक लैदर के बैग बनाए। देश में बढ़ते मोबाइल खरीदारों को देखकर उनके मन में डिज़ाइनर मोबाइल पाउच बनाने का ख्याल आया। नीना ने बेल्ट, वाॅलेट जैसे अन्य एक्सेसरीज भी बनाने शुरू किये।

आज ‘बैगिट’ के द्वारा बनाये प्रोडक्ट्स के सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दीवाने हैं। इतना ही नहीं देशभर में लगभग हर बड़े शहर में उनके फ्रेंचाइजी हैं। कंपनी का वैल्यूएशन 100 करोड़ के पार है।

कोई भी आइडिया बड़ा या छोटा नहीं होता। बस हमें चाहिए कि अपने आइडिया पर दृढ़-संकल्प होकर काम करें।