भूमिका
भारत की आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि भारत की विशाल जनसंख्या को रोजगार कैसे प्राप्त होगा। कैसे लोगों को उनके घर के निकट ही आजीविका कमाने का अवसर मिले ताकि वे अपने परिवार व अपने क्षेत्र के विकास में भागीदारी कर सके। इस हेतु भारत में समय समय पर समाज में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की सामान्य धारा में शामिल करने हेतु विभिन्न सरकारों ने समावेशी योजनाएं लागू की हैं। ऐसी योजनाओं को सूक्ष्म ऋण (Micro-finance) योजनाएं कहा जाता है।

प्रारम्भ
ऐसा ही एक प्रयास है – बन्धन बैंक। इसकी नींव पड़ी, वर्ष 1960 में जन्मे, त्रिपुरा के बिसालगढ़ गांव के, एक मिठाई विक्रेता पिता की संतान श्री चंद्रशेखर घोष के माध्यम से। बांग्लादेश के ढाका विश्वविद्यालय से सांख्यिकी विषय में स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद व वही पर तथा भारत में विभिन्न गैर सरकारी संगठनों में काम करने के बाद उन्होंने वर्ष 2001 में, केवल ₹2 लाख की पूंजी के साथ, पश्चिमी बंगाल में  बन्धन – कोन्नागर नामक एक गैर सरकारी संगठन की स्थापना की जिसका ध्येय था गरीब व  पिछड़े हुए समाज विशेषत: महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना ताकि वे सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका कमा सकें।

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(चंद्रशेखर घोष, फाउंडर एवं सीईओ , बंधन बैंक )

इस NGO द्वारा लघु ऋण वितरण के कार्य का प्रारम्भ किया गया पश्चिमी बंगाल की राजधानी कोलकाता से 60 किलोमीटर दूर बैंगन (Bengan) नामक एक ग्राम से। श्री घोष ने लघु ऋण देने का मॉडल इस प्रकार का बनाया जिसमें समूह के निर्माण के माध्यम से व्यक्ति को ऋण दिया जाता था। आज इस NGO की उपस्थिति भारत के 34 राज्यो तथा केंद्र शासित प्रदेशों में है।

धीरे धीरे व्यवसाय का आकार बढ़ता गया तथा वर्ष 2006 में इस लघु ऋण वितरण के कार्य को बढ़ावा देने के लिए इसे एक गैर बैंकिंग वित्तीय निगम (NBFC) बनाया गया। वर्ष 2010 तक आते  आते बन्धन भारत का सबसे बड़ा लघु ऋण वितरण करने वाला संस्थान बन गया था। कार्य विस्तार होता गया तथा वर्ष 2014 के अप्रैल माह में बन्धन को  बैंक के रूप में स्थापित करने की सैद्धांतिक सहमति मिल गई व 23 दिसंबर 2014 को बैंक की स्थापना हुई। जिस समय बैंक स्थापित हुआ तब इसकी 501 शाखाएं, 50 ATM व 2022 घर घर जाकर सेवा प्रदान करने वाले केंद्र (DSC) थे।

बाद में बैंक के उदघाटन समारोह में 23 अगस्त 2015 को भारत के तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली व अन्य कार्पोरट जगत की बड़ी हस्तियां सम्मिलित हुई। विशेष बात यह है कि स्वंतत्र भारत में स्थापित यह एक ऐसा बैंक है जिसका मुख्य कार्यालय पूर्वी भारत में कोलकाता में स्थित है। साथ ही किसी NBFC के बैंक में बदलने का  भी यह पहला उदाहरण है।

बैंक का स्वामित्व
बन्धन बैंक, बन्धन फाइनेंसियल होल्डिंग्स लिमिटेड, जिसकी स्वामी भारत की सबसे बड़ी लघु ऋण वितरण करने वाली बन्धन फाइनेंसियल सर्विसेज लिमिटेड (BFSL) है, की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कम्पनी है। इस कंपनी के अंशधारियों में अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC), SIDBI, FIG Investment Co तथा कुछ अन्य संस्थान व व्यक्ति शामिल हैं।

वर्तमान स्थिति
आज बन्धन बैंक की पूरे भारतवर्ष में 4044 शाखाएं काम कर रही हैं जिनमें लगभग 1.9 करोड़ ग्राहकों के ₹ 54908 करोड़ जमा हैं तथा ₹ 65456 करोड़ के अग्रिम ऋण दिए गए हैं। इस समय बैंक में कुल 37331 कर्मचारी रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।  वर्ष 2018 में यह बैंक कुल पूंजीकरण की दृष्टि से भारत में आठवें स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2019 में इस बैंक ने HDFC बैंक द्वारा समर्थित गृह फाइनेंस नामक कंपनी को अंश हस्तांतरण प्रक्रिया के माध्यम से अधिग्रहीत कर लिया।

आज भी यह बैंक ऐसे लोगो की वित्तीय आवश्यकताएं पूरी करने में लगा है जिन्हे औपचारिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं व जो अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य व स्वरोजगार के लिए प्रयासरत हैं। स्वदेशी आधारित विकेंद्रित अर्थ्यवस्था के निर्माण के लिए इस प्रकार के वित्तीय संस्थान बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार बन्धन बैंक भारत में एक  ऐसे सफल स्वदेशी बैंकिंग संस्थान का उदाहरण है जिसने समाज के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

 

Source: http://bandhanbank.com