बुढ़लाडा के डीएवी स्कूल के पास चल रही बर्गर की एक छोटी सी दुकान आजकल लोगों के आकर्षण के केंद्र बन गई है। यह वहां से गुजरने वाले व्यक्ति का ध्‍यान अपनी ओर खींच लेती है। दरअसल इसकी मुख्य वजह है इस दुकान का नाम। दुकान के अंदर काउंटर पर एक बैनर टंगा है। इ स पर लिखा है- बीएड बरगर प्वाइंट। यह दुकान चला रहे हैं राकेश कुमार उर्फ केशव। बीएड सहित कई डिग्रियां राकेश का अपनी दुकान के माध्‍यम से बड़ा संदेश देते हैं। वह कहते हैं, किसी भी हालत में हार मानना या बस व्‍यवस्‍था का रोना रोते रहने से बेहतर है हर काम को बड़ा बनाओ।

बेहद खास बीएड बर्गर प्वाइंट, युवक का संदेश- हर काम को बनाओ बड़ा

दुकान का नाम पढ़कर राहगीर उत्सुकता में यहां आते हैं और राकेश के बनाए बर्गर का आनंद लेते हैं। 35 वर्षीय  राकेश क्षेत्र के लोगों में केशव के नाम से मशहूर हैं और लोग उनके जज्‍बे की खूब तारीफ करते हैं। वह बीए, बीएड, एमए हिंदी की डिग्रियां ले चुके हैा। राकेश ने दो बार पी-टेट और एक बार सी-टेट भी पास किया है।

बीए, बीएड, एमए, पी-टेट और सी-टेट पास राकेश की दुकान का नाम देखकर रुक जाते हैं राहगीरों के कदम

सही नौकरी नहीं मिली ताे स्‍वरोजगार को अपनाया और बर्गर की दुकान खोल ली। दुकान नाम रखा बीएड बर्गर प्‍वाइंट रखने का मतलब कोई विरोध जताना नहीं है बल्कि यह संदेश देना है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं हाेता है। जज्‍बे से हर काम का बड़ा बनाया जा सक‍ता है।

वह बेचकर अपने परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं और भविष्‍य के सपने भी बुन रहे हैं। वह दुकान चलाने के साथ ही पंजाब सरकार की ओर से निकाली गई 2081 पोस्टों के लिए तैयारी में भी जुटा हुआ है। वह कहते हैं कि इतनी योग्यता होने के बावजूद बर्गर बेचने से वह बिलकुल शर्मिंदा नहीं हैं। उनके हौसले पूरी तरह से बुलंद हैं।

राकेश उर्फ केशव ने बताया कि मानसा के नेहरू कॉलेज से बीए और बरेटा से बीएड करने के बाद उसने चंडीगढ़ मेें पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए हिंदी की। यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान वह वहां पर एक एटीएम में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी करता था। गरीब परिवार से होने के कारण वह कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ वेटर का काम भी करता था। उसके परिवार के लोग रंग रोगन का काम करते हैं, इसलिए उनके साथ वह यह काम भी करता रहा है।

पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए करने के बाद उसने दो बार पंजाब सरकार का पी-टेट क्लीयर किया और उसके बाद सेंटर का सी-टेट पास किया। इसके बावजूद उसे आज तक नौकरी नहीं मिली है। खन्ना के एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी भी की, लेकिन कोई खास वेतन न मिलने पर उसने इसे छोड़ दिया। इसके बाद उसने अपना कुछ करने की ठानी और तय किया कि छोटे कदम से बड़ी मंजिल हासिल करने की कोशिश करेगा। छोटे काम को बड़ा बनाएगा।

राकेश ने बताया करीब एक महीना पहले ही उसने यहां पर बर्गर की दुकान खोली है। वेटर का काम करने के दौरान उसने टिक्कियां बरगर बनाने का काम सीखा था, इसलिए उसने बरगर की दुकान खोली। उसे कभी भी कोई काम करने में संकोच नहीं हुआ। उसकी नजर में कोई भी काम बड़ा छोटा नहीं होता है।

राकेश ने बताया कि वह इस काम के साथ-साथ नौकरी के लिए मास्टर कैडर की तैयारी भी कर रहे हैं। इस काम से भी  अच्छी खासी आय हो रही है। उसकी दुकान का नाम देखकर यहां से गुजरने वाला काफी लोग रुककर यहां आते हैं। लोग बर्गर खाने के साथ ही दुकान के नाम की वजह भी जरूर पूछते हैं। वह लोगों को कहते हैं कि सरकार को आईना दिखाने के साथ- साथ वह यह संदेश देना चाहते हैं कि किसी हाल हों हिम्‍मत नहीं हारें और कोई काम छोटा नहीं होता। हर काम को बड़ा बनाने का जज्‍बा होना चाहिए।

राकेश ने कहा, मेरी मंजिल ऊंची है और उसे हासिल करने का हौसला भी है। इतनी डिग्रियां हासिल करने के बाद उचित नौकरी नहीं मिलने की टीस तो है, लेकिन निराश या हताश नहीं हूं। वह बताया केि दुकान में रोज करीब एक हजार रुपये की बिक्री हो जाती है। खर्चे निकालकर करीब छह-सात सौ रूपये उसे बच जाते हैं।

 

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