केरल के इस युवा ने साइबर सिक्योरिटी को लेकर अभी तक जितनी भी सफलताएं हासिल की हैं, उससे केवल भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में यह नाम एक बड़े एथिकल हैकर और सिक्योरटी एक्सपर्ट के रूप में उभर कर आया है। 

बेनिल्ड जोसफ का जन्म केरल के वायनाड में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। तीन वर्ष की छोटी आयु में इन्होंने अपने पिता को खो दिया और मां ने ही इनका पालन पोषण किया। इनकी मां एक ऑफिस में काम किया करती थी। जोसफ भी अपनी मां के साथ ऑफिस जाया करता था। लेकिन जब वे थोड़े बड़े हुए तो ऑफिस में बड़ा शोर मचाया करते थे। ऐसे में जोसफ की मां उन्हें ऑफिस के पास स्थित कंप्यूटर सेंटर पर कुछ घंटे के लिए गेम खेलने के लिए छोड़ आती थी। 

अपना अधिकतर समय कंप्यूटर पर बिताने के कारण से युवा जोसफ का लगाव तकनीकी पेच समझने की ओर बढ़ता चला गया गया। सातवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान वे सोचने लगे कि इंटरनेट पर विभिन्न वेबसाइट को कैसे डेवलप किया जाता होगा? 

नौवीं कक्षा में तो इन्होंने खुद का सोशल नेटवर्किंग साइट विकसित कर ली। इस प्रयास के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया। उनके काम से उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और तकनीक के क्षेत्र में उनकी रुचि बढ़ती चली गई।

हैकिंग सीखने के लिए वे अपने घर से 100 किलोमीटर दूर जाया करते थे। वहां उनके शिक्षक में उन्हें एथिकल हैकर के महत्व को समझाया। 

आज बेनिल्ड भारत सरकार को, कानून व्यवस्था स्थापित करने वाली संस्थाओं को, और बड़े निजी संस्थाओं को उनके डाटा और वेबसाइट को सुरक्षित करने मै मदद करते हैं।

बेनिल्ड जोसफ ने अनेकों मुश्किलों को सामना करते हुए भी अपने शौंक को एक सफल उद्यम में बदला। इसके साथ ही वे विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों के बीच में प्रेरणादाई स्पीच भी देते हैं।