Can India boycott trade with China?

इस साल दिवाली पर कारोबारियों ने सिर्फ स्वदेशी सामान की बिक्री के लिए तैयारी शुरू कर दी है। कोरोना की वजह से पहले से ही चीनी सामान का आयात नहीं हो रहा था, वहीं अब बॉयकॉट चीनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए कारोबारियों ने हिंदुस्तानी दीवाली मनाने के लिए कमर कस ली है। देखिए ये रिपोर्ट।

रंग-बिरंगी रोशनी, टिमटिमाते दिए, खूबसूरत झालर और गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति, दिवाली के मौके पर हर साल बड़ी संख्या में इन सभी चीजों का आयात चीन से होता आया है। पिछले करीब 20 सालों से दीपावली से महीनों पहले से ही बाजार चीनी सामानों से भरने शुरू हो जाते थे, लेकिन इस बार घर और बाजार सिर्फ स्वदेशी सामानों से ही रौशन होंगे। दरअसल इस दिवाली देश के कारोबारियों ने सिर्फ मेड इन इंडिया सामान बेचने और खरीदने का फैसला लिया है।

एक कारोबारी विपिन आहुजा ने आवाज़ से कहा कि हम अपने शोरूम में छोटे-छोटे कारीगरों की तरफ से बनाई जा रही गणेश की मूर्तिया सजा रहे है, इसके अलावा सभी कारोबारी भी चीनी सामान को खरीदने या बेचने के हक में नहीं हैं।

एक अनुमान के मुताबिक हर दिवाली चीन से करीब 40 हजार करोड़ रुपए के सामान आयात किया जाता है और दिवाली से 2 महीने पहले ही व्यापारी स्टॉक जमा करने में जुट जाते हैं लेकिन कोरोना और गलवान घाटी में चीनी गतिविधियों के बाद व्यापारियों ने आर्थिक तौर पर इसका बदला लेने का फैसला किया है। स्वदेशी सामान को प्रमोट करने के लिए व्यापारियों की संस्था कैट ने देश भर में 300 जगह पर वर्चुअल Exhibition लगाने का भी फैसला किया है जिसकी शुरुआत राजधानी दिल्ली से की जा चुकी है।

कोरोना की वजह से पिछले 5 महीने से व्यापारियों का धंधा चौपट है लेकिन अब धीरे-धीरे हालात सुधार रहे हैं। ऐसे में कारोबारियों को उम्मीद है कि चीनी सामानों का बायकॉट और स्वदेशी को बढ़ावा देने की मुहिम से दिवाली पर अच्छी बिक्री हो सकती है।

 

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