कॉन्टेक्टलैस हैंड सैनेटाइज़र मॉडल के साथ निषाद चाचरा (फोटो साभार: educationworld)

फेस शील्ड, एरोसोल अवरोधक, रिसाइकिल बेड … इन पिछले तीन महीनों में छात्रों ने इनोवेशन की दुनिया में अपने पैर जमाने की कोशिश की है। IITs से लेकर सरकारी कॉलेज और स्कूल, प्रयोगशालाएं नए आविष्कारकों को जन्म दे रही हैं। बेंगलुरू के मराथल्ली स्थित विबग्योर हाई स्कूल के आठवीं कक्षा के छात्र, निषाद चाचरा ने हाल ही में कुछ ऐसा ही किया है।

उन्होंने हाल ही में एक ऑटोमैटिक कॉन्टेक्टलैस हैंड सैनिटाइज़र विकसित किया है। एक इंफ्रा-रेड सेंसर द्वारा संचालित, डिवाइस इंसान के मूवमेंट को कैप्चर करता है और उसके अनुसार कमांड एग्जीक्यूट करता है।

हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में छात्रों ने सस्ती फेस शील्ड विकसित की। पहले 3 डी प्रिंटिंग का उपयोग करके इसे निर्मित किया गया लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रों ने इंजेक्शन मोल्डिंग तकनीक का उपयोग किया। इससे उन्हें कम लागत पर उत्पादन दर को चौगुना करने में मदद मिली।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जालंधर ने रिसर्च और इनोवेशन का समर्थन करने के लिए $ 1 मिलियन का फंड बनाया है। ऑनलाइन हैकथॉन भी सर्वोत्तम प्रथाओं को पुरस्कृत कर रहे हैं।

मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छह इंजीनियरिंग छात्रों ने हाल ही में यूएस-स्थित मोटवानी जडेजा फैमिली फाउंडेशन द्वारा होस्ट किए गए CODE19 ऑनलाइन हैकथॉन में $ 5,000 का दूसरा पुरस्कार जीता। उनकी परियोजना, टेलीविटल, एक वेबकेम और ब्राउज़र के माध्यम से अपने महत्वपूर्ण आंकड़ों को कैप्चर करके दूरस्थ निदान को सक्षम बनाता है। 

आईआईटी गुवाहाटी के छात्रों ने इंटुबेशन बॉक्स को डिजाइन और विकसित किया है जो एरोसोल अवरोधकों के रूप में कार्य करता है। इन बक्सों को इंटुबैषेण के दौरान वायरस से लदी बूंदों के प्रवाह को सीमित करने के लिए रोगी के बिस्तर के सिर पर रखा जाता है।

आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं और पीएचडी छात्रों ने कोरोनावायरस के प्रसार की भविष्यवाणी के लिए एक वेब-बेस्ड डैशबोर्ड भी डेवलप किया। PRACRITI डैशबोर्ड तीन सप्ताह की अवधि के लिए विस्तृत राज्य-वार और जिलेवार भविष्यवाणियां देता है और साप्ताहिक रूप से अपडेट किया जाता है।

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