देश में जारी है वैक्सीनेशन का अभियान (फोटो: PTI)

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कहर और तीसरी लहर को लेकर अंदेशों के बीच हर देश की सरकार वैक्सीनेशन पर फोकस कर रही है. देश में एक तरफ जहां कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान तेजी से चल रहा है वहीं वैक्सीन शॉर्टेज को लेकर सियासी लड़ाई भी तेज है. 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए वैक्सीनेशन कैंपेन शुरू हुए एक महीने हो गए हैं लेकिन स्लॉट की बुकिंग और राज्यों के पास डोज की उपलब्धता को लेकर संकट बरकरार है. तमाम राज्य सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक जैसी देसी कंपनियों और फाइजर-मॉडर्ना-स्पुतनिक जैसी विदेशी कंपनियों से अपने लोगों के लिए वैक्सीन की डील करने की कोशिशों में जुटे हैं लेकिन पहले के ऑर्डर और सप्लाई की दिक्कतों के बीच मामला फंसा हुआ है. कोरोना महामारी से सुरक्षा के लिए वैक्सीन लगवाने की लोगों की कोशिशों के रास्ते में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं तो स्लॉट के लिए लोगों की वेटिंग भी लंबी होती जा रही है.

क्या है अभी देश में वैक्सीनेशन की स्थिति?

अगर 30 मई तक के आंकड़ों को देखें तो भारत में एक करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज अबतक लग चुकी है. यानी देश में कुल 21 करोड़ (21,20,66,614) वैक्सीन डोज अबतक लग चुकी है. इसमें 16,76,17,477 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगी है जबकि 4,44,49,137 लोग वैक्सीन की सेकेंड डोज भी लगवा चुके हैं. पिछले 24 घंटे में देश में 31 लाख वैक्सीन डोज लगाई गई हैं. जिसमें से 28 लाख फर्स्ट डोज जबकि 3 लाख 25 हजार लोगों को सेकेंड डोज लगी है. इससे पहले 26 मई को भी 21 लाख डोज लगाई गई थी. रोज देश में इसी रफ्तार से वैक्सीनेशन का काम हो रहा है. देश की आबादी के लिहाज से ये संख्या और रफ्तार कम जरूर है लेकिन दुनिया के बाकी देशों की तुलना में वैक्सीनेशन की ये रफ्तार कहां है आगे हम आंकड़ों के माध्यम से सामने रखेंगे.

देश में पिछले कई महीनों से वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है. पहले कोविड वॉरियर्स, फ्रंट लाइन वर्कर्स फिर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए, फिर 45 साल से ऊपर के लोगों के लिए और अब 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन शुरू किया गया है. यही नहीं अब 18 साल से नीचे के छात्रों को वैक्सीन लगाने की मांग हो रही है. मॉडर्ना जैसी विदेशी कंपनियां बच्चों की वैक्सीन तैयार कर लेने का दावा भी कर रही हैं. भारत में भी भारत बायोटेक बच्चों की वैक्सीन पर ट्रायल कर रही है.

देश में अबतक जिन 21 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है उनमें से 98.43 लाख हेल्थ वर्कर्स को पहली डोज जबकि 67.60 लाख को दूसरी डोज भी लग चुकी है. वहीं 1.55 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज जबकि 84.64 लाख को दूसरी डोज लग चुकी है. इसी तरह देश में 60 साल से ऊपर के 5.81 करोड़ लोग वैक्सीन की पहली डोज ले चुके हैं जबकि 1.85 करोड़ लोग दूसरी डोज ले चुके हैं. अगर 45 से 60 साल की उम्र वर्ग के लोगों की बात करें तो अबतक 6.46 करोड़ लोग वैक्सीन की पहली डोज ले चुके हैं जबकि 1.03 करोड़ डोज लग चुकी है. देश में वैक्सीन शॉर्टेज की बात करें तो 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन का काम शुरू हुआ था और इसी वर्ग के लोगों के लिए सबसे ज्यादा बवाल है. अबतक इस उम्र वर्ग के लोगों में से 1.68 करोड़ लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है जबकि 298 लोगों ने वैक्सीन की दूसरी डोज ली है.

विदेशों में क्या है वैक्सीनेशन की रफ्तार?

दुनिया में अगर वैक्सीनेशन के आंकड़ों पर गौर करें तो 28 मई तक दुनियाभर में 1.84 अरब वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है. यानी कि हर 100 लोगों की आबादी में से 24 डोज. अलग-अलग देशों में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी अलग है. क्योंकि कई देशों में वैक्सीन वहीं बन रही है तो कई देश वैक्सीन सप्लाई के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. सबसे ज्यादा वैक्सीनेटेड प्रतिशत वाले देशों की अगर बात करें तो इजरायल की कुल आबादी में से 57% फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है जबकि 60 फीसदी लोगों को वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है लेकिन ये कुल डोज एक करोड़ 5 लाख के करीब है क्योंकि वहां की आबादी भी काफी कम है.

इसी तरह ब्रिटेन में वैक्सीन की 6 करोड़ 33 लाख डोज अबतक लग चुकी है. आबादी में से 58 फीसदी लोग पहली डोज जबकि 37 फीसदी लोग वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके हैं. अमेरिका की बात करें तो अबतक 29 करोड़ वैक्सीन डोज लग चुकी हैं. 50 फीसदी लोग वैक्सीन की एक डोज जबकि 40 फीसदी लोग वैक्सीन की दो डोज लगवा चुके हैं. फ्रांस में वैक्सीन की 3 करोड़ 50 लाख डोज अबतक लग चुकी है. 37 फीसदी लोग एक डोज जबकि 16 फीसदी लोग दो डोज लगवा चुके हैं. जर्मनी में 5 करोड़ वैक्सीन डोज लग चुकी है. कुल आबादी में से 43 फीसदी लोग पहली डोज जबकि 17 फीसदी लोग दूसरी डोज भी लगवा चुके हैं. वहीं भारत की तरह कोरोना संकट से जूझ रहे एक और देश ब्राजील में वैक्सीन की 6 करोड़ 64 लाख डोज अब तक लग चुकी है. कुल आबादी में से 21 फीसदी लोग पहली डोज जबकि 10 फीसदी लोगों को दूसरी डोज भी लग चुकी है. रूस में वैक्सीन की 2 करोड़ 81 लाख डोज लग चुकी है. 11 फीसदी लोगों को वैक्सीन की पहली डोज जबकि 8.2 फीसदी लोगों को दूसरी डोज भी लग चुकी है.

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में अबतक वैक्सीन की 61 लाख डोज लग चुकी है. जिसमें से 2.2 फीसदी आबादी को पहली डोज और 0.7 फीसदी लोगों को दोनों डोज लग चुकी है. भारत की बात करें तो अबतक कुल 21 करोड़ डोज वैक्सीन की लग चुकी है. आबादी के 12 फीसदी लोग वैक्सीन की पहली डोज लगवा चुके हैं जबकि 3.1 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लग चुकी है. यानी आबादी के प्रतिशत के लिहाज से अगर देखें तो भारत लिस्ट में काफी नीचे है क्योंकि आबादी बड़ी है लेकिन अगर कुल डोज के लिहाज से देखा जाए तो भारत के 21 करोड़ से अधिक सिर्फ 29 करोड़ डोज अमेरिका में लगे हैं.

भारत में स्लो रफ्तार का कारण क्या है?

भारत में वैक्सीन शॉर्टेज को लेकर हो रहे हो-हल्ले के जवाब में सरकार ने कहा है कि वैक्सीनेशन तेज रफ्तार से जारी है लेकिन उसकी भी एक सीमा है. वैक्सीन बनाने, उसे लोगों को लगाने और विदेशों से खरीद की एक प्रक्रिया है और उसमें समय लगता है इसे सबको समझना होगा. वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने भी इसपर बयान जारी किया है. कंपनी ने कहा कि- COVAXIN के एक बैच के निर्माण, परीक्षण और रिलीज की समय सीमा लगभग 120 दिन है. यानी वैक्सीन के बनने के बाद उसके परीक्षण, सप्लाई और वैक्सीनेट करने में 120 दिन की समयसीमा लगनी ही है.

इसके अलावा विदेशों से वैक्सीन खरीदने में राज्यों की ओर से ग्लोबल टेंडर पर स्वीकृति नहीं मिलना भी देरी का कारण बन सकता है. IMF ने भारत में कोरोना संकट और वैक्सीन के मुद्दे पर एक नोट तैयार किया. जिसमें कई सुझाव दिए गए. IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ और इकोनॉमिस्ट रुचिर अग्रवाल द्वारा तैयार इस नोट में कहा गया कि विदेशों से वैक्सीन के लिए केंद्र द्वारा सेंट्रलाइज ऑर्डर दिया जाना चाहिए. भारत को जल्द से जल्द वैक्सीन की करीब एक करोड़ डोज के ऑर्डर देने की जरूरत है. आईएमएफ का कहना है कि अगर कोरोना पर कंट्रोल के लिए दुनिया को तेजी से आगे बढ़ना है तो 2021 के अंत तक दुनिया के हर देश की कम से कम 40 फीसदी आबादी को वैक्सीनेट करना ही होगा जबकि 2022 की पहली छमाही तक 60 फीसदी आबादी को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए.

कब तक हालात ठीक होने की उम्मीद? सरकार ने इस साल के आखिर तक देश के हर वयस्क नागरिक को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक इस साल के आखिर तक देश के पास वैक्सीन की कुल 267 करोड़ डोज होगी. सरकार ने वैक्सीनेशन का पूरा रोडमैप सामने रखा है. जुलाई तक 51 करोड़ डोज की खरीद होनी है.

क्या कदम उठाए जा रहे हैं? वैक्सीन शॉर्टेज को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है. तमाम आरोपों पर सरकार ने अपनी सफाई पेश की है. हेल्थ मिनिस्ट्री के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में जून महीने में वैक्सीन की 12 करोड़ डोज मौजूद होगी. जिसमें से 6 करोड़ डोज राज्य और प्राइवेट अस्पताल कंपनियों से सीधे खरीद सकेंगे. देश में वैक्सीन उत्पादन तेज करने के साथ-साथ विदेश से मंगाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं. इसमें फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉडर्ना जैसी कंपनियों से बातचीत हो रही है.

देश में भी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का उत्पादन तीन और कंपनियां करेंगी. इसके अलावा भारत बायोटेक अपना भी उत्पादन बढ़ाएगी. इसके लिए यूपी और महाराष्ट्र में नए उत्पादन संयंत्र लगाए जा रहे हैं. अक्टूबर तक भारत बायोटेक का उत्पादन 1 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ डोज करने का लक्ष्य है. सीरम इंस्टीट्यूट भी 6.5 करोड़ डोज प्रति महीने से बढ़ाकर अपनी उत्पादन क्षमता 11 करोड़ डोज करने जा रही है.

 

Source: Aaj Tak