स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को 11 देशों में विनियामक (रेगुलेटरी) से अनुमोदन प्राप्त हुआ है।

भारत बायोटेक की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को दुनिया के 11 देशों की नियामक एजेंसियों ने मंजूरी दे रखी है। अभी ब्राजील व हंगरी की नियामक एजेंसियां भी अध्ययन कर रही हैं और उनकी तरफ से मांगी गई जानकारी दे दी गई है। यही नहीं सात देशों की 11 कंपनियों ने भारत बायोटेक से कोवैक्सीन उत्पादन की अनुमित मांगी है। भारत बायोटेक ने इन देशों को जो दस्तावेज सौंपे है उसमें इस बात का जिक्र है कि उसकी वैक्सीन देने के छह महीने से आठ महीने तक कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी अमेरिका में भी ट्रायल करने की तैयारी में है। इसके लिए अमेरिका की एजेंसी एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) से छोटे स्तर पर तीसरे स्तर के क्लीनिकल ट्रायल के लिए बात हो रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग सूची प्राप्त करने के लिए डब्ल्यूएचओ को 90 प्रतिशत दस्तावेज जमा किए। शेष दस्तावेज जून में डब्ल्यूएचओ को प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है। भारत बायोटेक डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन उपयोग सूची प्राप्त करने के बारे में आश्वस्त है। कंपनी का कहना है कि  किसी देश ने वैक्सीन पासपोर्ट की स्थापना नहीं की है। सभी देशों की अपनी यात्रा आवश्यकताएं हैं, जिनमें एक नकारात्मक आरटी पीसीआर रिपोर्ट भी शामिल है। 

जून से शुरू होगी बच्चों की वैक्सीन का ट्रायल 

भारत बायोटेक जून से कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ का ट्रायल बच्चों पर शुरू कर सकती है। कंपनी को दो से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल करने की अनुमति पहले ही मिल चुकी है। भारत बायोटेक के बिजनेस डेवलपमेंट एंड इंटरनेशनल एडवोकेसी के प्रमुख डॉ. राचेस एला ने विश्वास जताया कि बच्चों के लिए वैक्सीन का लाइसेंस इस साल की तीसरी तिमाही में मिल सकता है। डॉ. एला ने बताया कि भारत बायोटेक इस साल के आखिर तक कोवैक्सीन की उत्पादन क्षमता 70 करोड़ तक कर लेगी।

कोवैक्सीन लेने वालों को विदेश यात्रा की अनुमति नहीं मिलने को सरकार ने बताया बेबुनियाद

ज्ञात हो कि पिछले दिनों कोवैक्सीन लेने वालों को विदेश यात्रा की अनुमति मिलने पर संदेह जताया गया है। वहीं केंद्र सरकार ने तत्काल ऐसे कयासों का खंडन करते हुए साफ कर दिया कि अभी तक विदेश यात्रा के लिए वैक्सीन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोई गाइडलाइन बनाई ही नहीं है।

कोवैक्सीन पर विवाद को नया शिगूफा बताते हुए केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि पूरी तरह से भारत में विकसित वैक्सीन को लेकर शुरू से ही विवाद खड़ा करने की कोशिश की जाती रही है। एक खबर के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता नहीं होने के कारण कोवैक्सीन लेने वालों को दूसरे देश वीजा देने से इन्कार कर सकते हैं। इस बारे में प्रकाश जावडेकर ने कहा कि जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैक्सीन को विदेश यात्रा से जोड़े जाने का कोई निर्णय ही नहीं लिया तो फिर इस तरह के बयान क्यों आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि इस तरह विवाद खड़ा करना ठीक नहीं। कोवैक्सीन तो सबसे ज्यादा प्रभावी है।

Source: Dainik Jagran