कठिन समय का दौर है आया,
भारत के अस्तित्व पे अंधेरा छाया।
मुश्किल में है देश का हर इंसान,
कैसे उबरेगा हमारा हिंदुस्तान।

अपनी शक्ति पहचानी होगी,
आत्मनिर्भरता अपनानी होगी।
बहुत चले दूसरों की बैशाखी पर,
खोयी चेतना फिर से जगानी होगी।

मत भूलो यह भूमि है वीरों की,
चपल, सचेतन रणधीरों की।
जिनके बल पर स्वतंत्रता पायी,
अपनी मातृभूमि की लाज बचाई।

आज वही घड़ी आन पड़ी है,
दुश्मन ने घिनौनी चाल चली है।
मित्र बनाकर जिसपे किया विश्वास,
उसी ने पीठ पर किया है वार।

अब तो सही रणनीति अपनानी होगी,
देश में जागरुकता फैलानी होगी।
चाइना के माल का बहिष्कार करके,
स्वदेशी की राह अपनानी होगी।

(दीप्ति सोनी)

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