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वित्त मंत्रालय ने देश के छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद में विदेशी कंपनियों को शामिल नहीं करने का फैसला किया है. घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए नियमों में संशोधन करने का यह फैसला किया गया है. यह जानकारी रविवार को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आत्मनिर्भर भारत आर्थिक पैकेज की प्रगति की समीक्षा करने के बाद मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में दी गई है. इस बयान के अनुसार, देश के एमएसएमई (सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम) को राहत देते हुए व्यय विभाग ने सामान्य वित्तीय नियमों, 2017 के वर्तमान नियम 161 (PA) और वैश्विक निविदाओं से संबंधित जीएफआर नियमों में संशोधन किए हैं.

वित्त मंत्रालय ने बताया कि अब 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद से संबंधित निविदा के लिए कोई वैश्विक निविदा पूछताछ या ग्लोबल टेंडर इंक्वायरी (जीटीआई) तब तक आमंत्रित नहीं की जाएगी जब तक कि कैबिनेट सचिवालय से इसकी पहले से मंजूरी ना मिल जाए. बयान में कहा गया कि वित्त मंत्री ने यह घोषणा की है कि रेलवे, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और सीपीडब्ल्यूडी जैसी सभी केंद्रीय एजेंसियां अनुबंधात्मक या संविदात्मक दायित्वों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय विस्तार देंगी, जिनमें ईपीसी और रियायत समझौते से संबंधित दायित्व भी शामिल हैं.

व्यय विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि कोविड19 महामारी के कारण अप्रत्याशित स्थिति या आपदा से जुड़ी धारा (एफएमसी) का उपयोग करके ठेकेदार या रियायत प्राप्तकर्ता पर कोई भी खर्च या जुर्माना लगाये बिना ही अनुबंध की अवधि को कम-से-कम तीन माह और अधिक-से-अधिक छह माह बढ़ाया जा सकता है. मंत्रालय ने कहा कि ठेकेदार या आपूर्तिकर्ताओं को कार्य-प्रदर्शन संबंधी सिक्योरिटी के मूल्य को वापस करने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं जो बाकायदा की जा चुकी आपूर्ति या कुल अनुबंध मूल्य के पूरे हो चुके अनुबंध कार्य के अनुपात में होगा. इसे विभिन्न विभागों और मंत्रालयों द्वारा लागू किया जा रहा है.

 

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