भूमिका
भारत के भिन्न भिन्न क्षेत्रों में भिन्न भिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाए और खाए जाते हैं। उन क्षेत्रों में ऐसे सब खाद्य पदार्थ एक ब्रांड के रूप में प्रचलित होते हैं। हल्दीराम ऐसा ही एक ब्रांड है जिसकी स्थापना की वर्ष 1937 में बीकानेर में एक युवा श्री गंगा बिशन अग्रवाल ने जिन्हे प्यार से सभी हल्दीराम कहा करते थे।

छोटी सी दुकान से 3500 करोड़ का ...

श्री गंगा बिशन अग्रवाल

प्रारम्भ
श्री अग्रवाल के परिवार की एक छोटी सी दुकान राजस्थान के बीकानेर में थी जिसमे भुजिया का कारोबार होता था। उन्होंने भुजिया बनाने के तरीके में थोड़ा सा परिवर्तन करके, बीकानेर के लोकप्रिय राजा डूंगर सिंह के नाम पर, डूंगर सेव नाम से भुजिया बना कर बेचना शुरू किया। पहले दस वर्षों के पश्चात इनकी बिक्री प्रति सप्ताह 200 किलो भुजिया बना कर बेचने तक पहुंच चुकी थी। परन्तु व्यवसाय का असली विस्तार तब हुआ जब इनकी तीसरी पीढ़ी अर्थात पोतों श्री शिव किशन व श्री मनोहर अग्रवाल ने व्यवसाय में भाग लेना शुरू किया।

(बीकानेर में उनकी पहली दुकान)

विकास व विस्तार
एक बार हल्दीराम जी एक विवाह समारोह में भाग लेने के लिए कोलकाता में गए। वहीं से इनके मन में विचार आया कि क्यों न इस बड़े शहर में अपना व्यवसाय आरंभ किया जाए और फिर उन्होंने कोलकाता में वर्ष 1958 हल्दीराम भूजियावाला के नाम से अपना एक कारखाना लगाया। इसके बाद 1970 में जयपुर में एक कारखाना लगाया। धीरे धीरे हल्दीराम ने नमकीन के अतिरिक्त अन्य मिठाईयां बनाने का काम भी शुरू कर दिया।

इसके पश्चात श्री शिव किशन अग्रवाल ने नागपुर में हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल व दिल्ली में भी हल्दीराम ब्रांड के नाम से कार्य शुरू किया। दिल्ली में हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड (HSPL) के नाम से वर्ष 1983 में कार्य प्रारम्भ किया। वर्ष 1990 में हल्दीराम ने आलू के चिप्स बनाने की अमेरिका से आयातित मशीन लगाकर चिप्स बनाकर बेचने का कार्य शुरू कर दिया।  वर्ष 1993 में हल्दीराम ने पहली बार निर्यात के क्षेत्र में प्रवेश किया जब इन्होंने अमेरिका में भी अपने उत्पाद बेचने शुरू किए। उधर एक समान गुणवत्ता का उत्पादन करने के लिए हल्दीराम ने उत्तर प्रदेश के नोएडा, हरियाणा के गुरुग्राम, महाराष्ट्र के नागपुर तथा उत्तराखंड के रुद्रपुर में कारखाने लगाए। व्यवसाय को विस्तार देने की दृष्टि से हल्दीराम ने रेस्त्रां के व्यवसाय में भी प्रवेश किया तथा आज कोलकाता, दिल्ली, नागपुर व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुल 53 रेस्त्रां कार्य कर रहे हैं।

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(हल्दीराम, डेरा बस्सी)

वर्ष 2003 में हल्दीराम ने शीघ्र तैयार खाद्य पदार्थो (Convenience Food) के बाजार में भी प्रवेश कर लिया है। ट्रस्ट रिसर्च एडवाइजरी द्वारा जारी की गई ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में हल्दीराम देश के सबसे विश्वसनीय ब्रांड में 55 वें स्थान पर था। वर्ष 2016 में जैसे ही हल्दीराम का रेवेन्यू ₹ 4000 करोड़ से अधिक हुआ तो इसका कारोबार हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड या नेस्टले मैगी के पैकजड खाद्य पदार्थो के कारोबार से दुगना तथा दो अमेरिकन फास्ट फूड कंपनियों मैकडोनाल्ड्स व डोमिनोज़ के कुल कारोबर से अधिक हो गया था। वर्ष 2017 में सितंबर में समाप्त होने वाले वर्ष में जैसे ही हल्दीराम का कुल विक्रय ₹4224 करोड़ से अधिक हुआ वैसे ही यह कंपनी पेप्सिको जैसी कंपनी को पीछे छोड़ कर भारत में स्नैक्स का व्यवसाय करने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन गई।

वर्तमान स्थिति
आज हल्दीराम पारंपरिक खाद्य पदार्थ जैसे भुजिया, दाल, चिवड़े, पापड़, आचार, शर्बत, भारतीय मिठाईयां व नट्स के अतिरिक्त चिप्स, कुरकुरे व Cheese Balls जैसे आधुनिक 400 प्रकार के खाद्य पदार्थ बना रहा है। वर्ष 2018 में अपने 3000 संग्रहकर्ताओं व 14.25 लाख विक्रेताओं के  माध्यम से हल्दीराम का कुल रेवेन्यू ₹ 5532 करोड़ था जिसमें पैकेजड खाद्य पदार्थो का भाग 85%, नमकीन 60%, नमकीन स्नैक्स 12%, मिठाईयां 7%, फ्रोजन फूड 4%, निर्यात 9% तथा रेस्त्रां का हिस्सा 15% है। हल्दीराम के उत्पाद न केवल भारत में बल्कि दुनिया के 80 से अधिक देशों जिनमें अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, जर्मनी, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड व जापान इत्यादि शामिल हैं,  में भी बेचे जाते हैं। इसके अतिरिक्त हल्दीराम ने विश्व की दूसरे नंबर की बेकरी श्रृंखला ‘Cafe Brioche Doree’ के साथ फ्रेंचाइजी अनुबंध किया है जिसके अन्तर्गत इस बेकरी श्रृंखला ने पहली बार पूर्णतय शाकाहारी खाद्य पदार्थो को बेचने का अनुबंध किया है। वर्ष 2019 के लिए हल्दीराम का कुल विक्रय ₹ 4500-5000 करोड़ तथा लाभ ₹450-500 करोड़ होने का अनुमान है। इस प्रकार हल्दीराम एक ऐसा सफल स्वदेशी उद्यम बन गया है जिसने भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से लोकप्रिय बनाने में सफलता प्राप्त की है।

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Source: www.haldiramonline.com
www.economictimes.com