सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल ने 4जी सेवाओं के लिए नए सिरे से निविदा आमंत्रित करने का मन बनाया है। फेज-9 के लिए किए गए टेंडर को फिलहाल रोक दिया गया है। एक कमेटी गठित हुई है जिसकी सिफारिश के बाद निर्णय होगा।  किसी स्वदेशी कंपनी को उपकरणों के लिए मौका देने की तैयारी है। यानी प्रतिस्पर्धा अपनों के ही बीच हो। दूसरी बड़ी बात यह कि चीन से कंपनी ने तौबा कर ली है। ऐसे में यह साफ हो गया है कि 4जी भले देर से आए लेकिन किसी चीन की कंपनी को अब मौका नहीं मिलने वाला।

मौजूदा समय बीएसएनएल 2जी और 3जी सेवाएं दे रहा है। यूपी में 11 शहरों में प्रयोग के तौर पर 4जी सेवा दी जा रही है। मार्च में बीएसएनएल ने 4जी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच लॉकडाउन लग गया। जब अनलॉक-1 शुरू हुआ तो चीन ने लद्दाख में घुसपैठ शुरू कर दी। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया। अब इसी को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से स्वदेशी कंपनियां तलाशी जा रही हैं। बीएसएनएल के प्रधान महाप्रबंधक एके मिश्रा के अनुसार उपकरणों की खरीद का कार्य दिल्ली स्थित मुख्यालय से होगा। अब जो कमेटी गठित की गई है वह जो भी निर्णय लेती है उसका पालन कराया जाएगा।

अभी पुर्जा-पुर्जा चाइनीज
बीएसएनएल ने 2014 में नए उपकरणों के लिए चीन की जेडटीई से करार किया था। तब से अब तक यूपी पूर्व में ही चार हजार से अधिक मोबाइल टॉवर पर इसी कंपनी के उपकरण लगाए जा चुके हैं। देशभर में 10 हजार करोड़ रुपए के उपकरण लगे हैं। इनमें बीटीएस से लेकर आरएनसी यानी जिससे बीटीएस सम्पर्क जोड़ा जाता है, सर्वर आदि शामिल हैं। साथ ही ब्रॉडबैंड में भी चीनी कंपनियों के उपकरण लगे हैं। उस समय कम खर्च में अच्छी तकनीक मिल गई थी और चीन से भी रिश्ते बढ़िया थे। बीएसएनएल के अधिकारियों के अनुसार 80 फीसदी उपकरण चीन के हैं।

 

Credits: https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-india-china-tensions-indian-company-will-get-a-chance-to-avoid-chinese-equipment-for-bsnl-4g-3313825.html