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File Photo | Justdial

झंडेवाला खिलौना मार्केट में ‘मेड इन इंडिया’ के खिलौने चीन को सीधी टक्कर दे रहे हैं। पिछले चार माह में ही इस बाजार ने चीनी उत्पादों पर निर्भरता में 20 फीसद की कमी लाई है। वहीं, ‘वोकल फार लोकल’ के तहत देसी उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर पूरा जोर दे रहा है। किसी-किसी दुकान पर 70 से 80 फीसद उत्पाद स्वदेशी हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बाजार का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के दुकानदार खुद खरीदारों को देसी उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने दुकानदारों की प्रशंसा भी की। इस बाजार में खिलौने के साथ ही साइकिलें भी मिलती हैं। बाजार में साइकिल व खिलौनों की 150 से अधिक दुकानें हैं। यहां के दुकानदारों के मुताबिक पहले इस बाजार की निर्भरता पूरी तरह से चीनी उत्पादों पर थी, पर जब से सरकार ने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, इस बाजार का मिजाज बदला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई भाषणों में खुद स्वदेशी खिलौनों का जिक्र करते हुए देशवासियों से इसे प्रोत्साहन देने की अपील कर चुके हैं। इसके साथ ही सरकार की नीतियां भी खिलौना उद्योग को लेकर लचीली और प्रोत्साहित करने वाली हैं। अब देश में बन रहे खिलौने उत्पाद गुणवत्ता व दाम के मामले में चीनी उत्पादों से कहीं बेहतर हैं। इनमें स्लाइडर, राकर, कुर्सी, फिक्सन कार, स्वीमिंग झूला, साइकिल, टेबल टेनिस समेत 200 से अधिक उत्पाद हैं, जो विदेश में भी लोकप्रिय होने लगे हैं।

चीन से हमारा टकराव चल रहा है। ऐसे में हम क्यों उसकी अर्थ व्यवस्था को मजबूती देने का काम करें। वैसे भी हमारे देश के उत्पाद बनेंगे और बिकेंगे तो हम आत्मनिर्भर होंगे। इसी सोच के साथ हम देसी उत्पादों को बढ़ावा दे रहे हैं। 70 फीसद से अधिक उत्पाद स्वदेशी हैं। यह अच्छी गुणवत्ता के व आकर्षक हैं। इनके दाम भी चीनी उत्पादों से कम है। खरीदारी में भी लोग इन्हें तरजीह दे रहे हैं। मैं ग्रेटर नोएडा से एजुकेशन से जुड़े खिलौने खरीदने आया हूं। देसी खिलौने काफी अच्छे हैं। हमारा भी पूरा जोर देश के उत्पादों को बढ़ावा देने पर है। जब हमारे पास बेहतर विकल्प है, तो क्यों हम दूसरे देश के उत्पाद को खरीदें। खरीदारी करते समय दुकानदार खुद इस बात को लेकर जागरूक कर रहे हैं कि कौन से उत्पाद देसी हैं और कौन से चीन निर्मित। ~ राकेश, खरीदार, ग्रेटर नोएडा

सरकार खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए नियम कानूनों को आसान बनाया गया है। तमाम अवरोधों को हटाया जा रहा है। यही नहीं, देसी उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने व आकर्षक बनाने के लिए तकनीकी सहायता भी मिल रही है। ताकि हम वैश्विक स्तर के खिलौनों का निर्माण कर सकें, जो खिलौने पहले हम चीन से मंगाते थे, वह अब देश में ही बन रहे हैं। जरूरत अब इस क्षेत्र को रोजगार के लिए आकर्षक बनाने और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की है। –विपिन निझावन, सचिव, ट्वाय एसोसिएशन आफ इंडिया

 

Source Link: Dainik Jagran