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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में ‘आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन

भोपाल। प्रत्येक भारतीय के मन में यह आत्मविश्वास पैदा करना कि वे स्वावलंबन के माध्यम से परिवार और समाज को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, यही ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सही संकल्पना है। यह विचार स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संगठक श्री सतीश कुमार ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने की।

जनसंचार विभाग द्वारा आयोजिय विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता श्री सतीश कुमार ने कहा कि आत्मनिर्भरता के विचार को सही अर्थों में समाज तक पहुंचाने का कार्य शिक्षक बेहतर ढंग से कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विचार एक परिभाषा में बांधना सम्भव नहीं हैं, समाज में इसके सही दृष्टिकोण को रखे जाने की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के पूर्व कृषि, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में हमारी निर्भरता अन्य देशों पर अधिक थी, लेकिन कोविड काल ने हमें इस दिशा में पुनः सोचने के लिए मजबूर किया है। यही कारण हैं कि पीपीई किट, वेंटिलेटर और वैक्सीन जैसे मेडिकल संसाधनों में हम आत्मनिर्भरता की तरफ तो बढ़ ही रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी शक्ति का उपयोग सुरक्षा के लिए किया है, किसी अन्य पर अधिकार जताने या हमले के लिए नहीं। इसके लिए उन्होंने परमाणु विस्फोट किये जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके माध्यम से भारत ने बताया कि वो अब विश्व में अपनी वसुदेव कुटुम्बकम की भूमिका को निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा की हमें अंग्रेजियत द्वारा पैदा की गयी हीनग्रंथि से बाहर निकलना होगा। कोविड काल के दौरान सरकार द्वारा लिए गए कठोर निर्णयों को भी उन्होंने जरुरी बताते हुए कहा कि उसका ही प्रभाव है कि आज कोविड के खतरे से हम उतने प्रभावित नहीं हुए, जितनी आशंका जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व की सोच के विपरीत आर्थिक तंत्र की बेहतरी के स्थान पर जीवन की सुरक्षा को अधिक महत्व दिया। जिसके सुखद परिणाम अब नजर भी आ रहे हैं।

श्री सतीश ने कहा कि हमें परिवार को आत्मनिर्भर बनाने और हमारी पुरातन संस्कृति की ओर लौटने का प्रयास करना होगा। यही आत्मनिर्भरता लाने का सही मार्ग है। हमें इसके लिए स्वदेशी सामग्री को अधिक से अधिक अपनाना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि शिक्षक की भूमिका मानव उत्थान और चरित्र निर्माण की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारे आत्म सम्मान से जुड़ी हुई है, अगर ये जाग गया तो आत्मनिर्भरता पाना तय है। इसके लिए उन्होंने विश्व में भारतीय संचार मॉडल को प्रचलित करने और संवाद संस्थाएं बनाये जाने को जरूरी बताया, ताकि भारतीय विचार सही अर्थों में दुनिया जान सके। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन ने हमें महामारी से लड़ने के लिए तैयार किया। हमें अपने पर विश्वास करते हुए यही विश्वास छात्रों में भी पैदा करना होगा ताकि युवा भी आत्मनिर्भर बनने की और बढ़ सके। कार्यक्रम के समन्वय एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष जोशी ने कहा कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने में मीडिया शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अविनाश वाजपेयी ने आभार व्यक्त किया।