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माइक्रोमैक्स के सह संस्थापक और सीईओ राहुल शर्मा

आज हम आपके सामने एक ऐसे सफल कारोबारी की कहानी पेश कर रहे हैं, जिसने बिज़नेस जगत में कदम रखते ही देश के मोबाइल उद्योग में क्रांति पैदा किया। पहली पीढ़ी के इस युवा उद्यमी ने देश के मोबाइल उद्योग की दशा व दिशा के साथ-साथ आम भारतीय की जीवनशैली को भी बदल दिया। एक शिक्षक के इस पुत्र ने करोड़ों भारतीयों के हाथों में सुंदर, सस्ते और टिकाऊ स्मार्टफोन थमा कर अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपेक्षाकृत कम कीमत में बेहतर स्मार्टफोन पेश करने को मजबूर किया। उनकी कारोबारी सफलता नई पीढ़ी के लिए बेहद प्रेरणादायक है।

हम बात कर रहे हैं माइक्रोमैक्स के सह संस्थापक और सीईओ राहुल शर्मा के बारे में। दिल्ली के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्में राहुल के पिता स्कूल में अध्यापक थे और उनका बचपन टीचर्स कालोनी में बीता। एक साधारण से परिवार में पले-बढ़े राहुल ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मशीनी अभियांत्रिकी में डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में कुछ सालों तक नौकरी की।

तकनीक से बेहद लगाव की वजह से राहुल ने खुद की एक सॉफ्टवेर कंपनी बनाने की सोची। इस कड़ी में उन्होंने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर वर्ष 2000 में माइक्रोमैक्स सॉफ्टवेयर की शुरुआत की। यह कंपनी शुरुआत में सिर्फ एक सॉफ्टवेयर कंपनी ही थी, फिर बाद में फिक्स्ड वायरलेस पीसीओ आदि बेचने आरम्भ किये।

माइक्रोमैक्स ने कारोबार का विस्तार करते हुई नोकिया और एयरटेल जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी करते हुए उन्हें पीसीओ बेचे। साल 2007 में एक बिज़नेस दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल में राहुल ने देखा कि बिजली नहीं आने की वजह से ट्रक की बैटरी से पीसीओ को चलाना पड़ रहा था। इतना ही नहीं दिन भर पीसीओ वाले के पास फ़ोन चार्ज करने वालों की लम्बी लाइन होती थी और वो मन मर्ज़ी के पैसे चार्ज करता था।

इससे राहुल के मन में एक आइडिया आया। वह आइडिया यह था कि लंबी बैटरी बैकअप के साथ सस्ते दामों में मोबाइल फोन लांच करना। उनका यह आइडिया बेहद क्रांतिकारी सिद्ध हुआ और इस तरह माइक्रोमैक्स मोबाइल की शुरुआत मात्र 2150 रुपए में एक महीने के बैटरी बैकअप वाले फोन से हुई। लांच के महज़ 10 दिनों के भीतर ही देश के ग्रामीण क्षेत्र में 10 हजार से भी ज्यादा मोबाइल बिना विज्ञापन के बिक गया। इसके साथ माइक्रोमैक्स ने ग्राहक की जरूरत को भांपते हुए भारतीय मोबाइल उद्योग में एक अग्रणी कंपनी बन गयी।

2014 में, भारत में माइक्रोमैक्स की बिक्री सैमसंग की तुलना में अधिक थी। यह भारत में एक तिमाही में सबसे अधिक टेलीफोन शिप करने वाला मोबाइल टेलीफोन निर्माता बन गया। 24 जनवरी 2014 को, माइक्रोमैक्स रूस में बेचने वाली पहली भारतीय मोबाइल कंपनी बन गई।

मोबाइल सेगमेंट में सफलता के बाद बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, कंपनी खुद को एक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के रूप में स्थान देने की कोशिश कर रही है। इस कड़ी में कंपनी टीवी से लेकर कई इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बना रही है। साथ ही कंपनी ने ई-बाइक कंपनी रिवॉल्ट मोटर्स का शुभारंभ भी किया है।

माइक्रोमैक्स ने कुछ साल पहले नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुरू किया था और तब से अन्य देशों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। माइक्रोमैक्स का रूस में 5% हिस्सा है। मध्य पूर्व और अफ्रीका के देशों में भी कंपनी अपनी पैठ बनाना चाह रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में कंपनी की वैल्यूएशन 21000 करोड़ के करीब है।

राहुल अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पिता को ही देते हैं। राहुल ने वर्ष 2015 में बॉलीवुड एक्ट्रेस असिन से शादी की। आज राहुल की निजी प्रॉपर्टी कई करोड़ के पार आंकी जाती है।

जो लड़का कभी एक साधारण से परिवार में पला-बढ़ा, आज लक्ज़री जिन्दगी का आनंद उठा रहा है। और इस सब के पीछे है उनकी कड़ी मेहनत और कुछ नया करने की चाह।