जैसा कि देशभर में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। वहीं मुंबई का एक डॉक्टर दंपति लोगों की जान बचाने के लिए अपनी अनोखी पहल के साथ आगे आया है।

मुंबई का यह 37 वर्षीय डॉक्टर दंपति उन लोगों से बची हुई दवाइयाँ इकट्ठी कर रहा है, जो कोविड-19 से रिकवर हो चुके हैं, और इन दवाओं को वे जरूरतमंद मरीजों में बांट देते हैं।

बीती 1 मई को, डॉ. मार्कस रन्नी और उनकी पत्नी डॉ. रैना ने मेड्स फॉर मोर (Meds For More) पहल की शुरूआत की, जो कि कोविड से रिकवर हो चुके लोगों से बची हुई दवाओं को इकट्ठा करने की एक नागरिक पहल है।

डॉ. मार्कस रन्नी ने समाचार ऐजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “हमने यह पहल 10 दिन पहले शुरू की थी। हम हाउसिंग सोसाइटियों से दवाइयाँ इकट्ठा करते हैं और उन लोगों को मुहैया कराते हैं, जो उन्हें खरीद नहीं सकते।”

डॉ. मार्कस रन्नी ने आगे बताया, “हमारे पास अब 100 बिल्डिंग्स हैं जो हमें दवाइयां भेज रही हैं। हम आठ लोगों की टीम हैं और निश्चित रूप से, अलग-अलग बिल्डिंग्स में स्वयंसेवक हैं। पिछले सप्ताह हमने 20 किलोग्राम दवाइयां एकत्र कीं, जिन्हें पैक करके हमारे एनजीओ सहयोगियों को दे दिया गया है।”

डॉ. मार्कस रन्नी और उनकी पत्नी डॉ. रैना ने ‘मेड्स फॉर मोर’ पहल की शुरूआत की है (फोटो साभार: ANI)

NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेड्स फॉर मोर पहल के विचार के बारे में बात करते हुए डॉ. मार्कस की पत्नी डॉ. रैना ने कहा, “यह विचार तब आया जब हमारे कर्मचारियों में से एक का परिवार कोविड से संक्रमित हो गया और उन्हें दवा की आवश्यकता थी। जैसा कि आप जानते हैं कि दवाएं महंगी हो सकती हैं। उस समय कुछ लोग थे जो कोविड से रिकवर हो गए थे, इसलिए हमने उनसे दवाएं लेने और उन्हें जरूरतमंदों में बांटने का फैसला किया।”

मेड्स फॉर मोर ने सभी तरह की अप्रयुक्त दवाओं जैसे एंटीबायोटिक्स, फैबिफ्लू, पैन रिलिफ, स्टेरॉयड, इनहेलर, विटामिन, एंटासिड, आदि को एकत्र किया, जो कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए उपयोग की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, वे पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर जैसे बेसिक मेडिकल उपकरण भी एकत्र कर रहे हैं।

HindustanTimes की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. रन्नी, जो कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के साथ मिलकर पिछले साल महामारी के दौरान दादर की मलिन बस्तियों में कोविड-19 रोगियों की स्क्रीनिंग और उपचार का काम कर चुके हैं, ने कहा, “पूरे देश में कोविड-19 रोगियों को दवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। तो क्यों एक भी खुराक बर्बाद हो? इनका उपयोग ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है, जो सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इस पहल के माध्यम से, हम ऐसे वंचित लोगों की मदद करना चाहते हैं।”

इस डॉक्टर दंपति ने रिकवर हो चुके मरीजों से 20 किलोग्राम अप्रयुक्त कोविड-19 दवाइयां केवल 10 दिनों में एकत्र की हैं। इन दवाओं को वंचितों के समय पर इलाज के लिए भारत भर के ग्रामीण जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को दान किया जाएगा, जो कोविड से संक्रमित हैं।

पहल के बारे में बढ़ती जागरूकता के साथ, पड़ोसी इमारतों के निवासियों ने दवाओं को इकट्ठा करने के लिए स्वेच्छा से काम शुरू किया है।

 

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